पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अप्रत्याशित प्रदर्शन करते हुए शानदार जीत हासिल की है. वह पहली बार सत्ता में आई है. अब यहां की सियासत में यह सवाल किया जा रहा है कि चुनाव के दौरान चर्चा में रही वोटर लिस्ट की ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ यानी SIR प्रक्रिया का कितना असर रहा? हालांकि, (who benefited from deletion) अभी भी अंतिम आंकड़े तय किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक के परिणाम काफी कुछ बता रहे हैं.
राज्य की वो 20 सीट, जहां जांच-पड़ताल के बाद सबसे अधिक नाम काटे गए, वहां पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 13 सीटों पर जीत हासिल की है. जबकि BJP ने 6 और कांग्रेस ने एक सीट पर जीत दर्ज कराई.
मुर्शिदाबाद जिले में कटे सबसे अधिक नाम
मुर्शिदाबाद जिले की समशेरगंज सीट पर सबसे अधिक 74,775 वोटर्स के नाम काटे गए थे. लेकिन यहां पर जीत टीएमसी को मिली है. इसी तरह इसी जिले की लालगोला सीट पर भी जीत टीएमसी के खाते में गई. यहां 55,420 लोगों के नाम काटे गए थे. इसी से सटे भगवानगोला (47,493 वोटर्स के नाम कटे) क्षेत्र में भी टीएमसी को जीत मिली.
who benefited from deletion – इस तरह से देखा जाए तो उन 20 सीटों में से सबसे अधिक काटे गए नाम वाले शीर्ष 5 विधानसभा सीटों पर जीत टीएमसी के खाते में गई. फरक्का (6ठां नंबर) जहां 38,222 लोगों के नाम कटे, वहां कांग्रेस को जीत मिली. जबकि जंगीपुर जो नाम काटे जाने के मामले (36,581 वोटर्स) में आठवें नंबर पर है, वहां बीजेपी के खाते में जीत आई. इसके बाद रतुआ (35,573) और करांदिघी (31,562) में भी बीजेपी के प्रत्याशियों ने जीत हासिल की. इस तरह से 20 में से 13 सीटों पर टीएमसी को जीत मिली और एक में कांग्रेस को. शेष 6 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली.
