बीजेपी की आंधी ने बंगाल विधानसभा की पूरी सियासी तस्वीर ही बदल दी है. 17वीं विधानसभा (2021-26) के मुकाबले इस बार बंगाल विधानसभा में मुस्लिम और महिला विधायक कम दिखेंगे. ब्राह्मण (BJP’s storm in Bengal) विधायकों की संख्या में भी कमी आई है. इसके मुकाबले बंगाल में कायस्थ विधायकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. इसी तरह बंगाल में दलित विधायकों की संख्या करीब 70 और आदिवासी विधायकों की संख्या 16 है. बंगाल में दलितों के लिए 68 सीट रिजर्व है.

पश्चिम बंगाल की 293 सीटों के नतीजे आए हैं. इनमें 206 पर बीजेपी को जीत मिली है. 80 पर तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की है. वहीं उन्नयन पार्टी को 2, कांग्रेस को 2 और सीपीएम-सेक्युलर फ्रंट गठबंधन को 2 सीटों पर जीत मिली है. बंगाल में सरकार बनाने के लिए 148 विधायकों की जरूरत होती है.

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2021 विधानसभा चुनाव में बंगाल में 42 मुस्लिम विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे थे. इस बार मुस्लिम विधायकों की संख्या 36 है. कांग्रेस से 2 मुस्लिम जीतकर सदन पहुंचे हैं. इसी तरह सेक्युलर फ्रंट के एक मुस्लिम विधायक चुने गए हैं. उन्नयन पार्टी के हूमायुं कबीर 2 सीटों पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. माकपा को एक सीटों पर जीत मिली है, उनके विधायक भी मुस्लिम हैं.

तृणमूल कांग्रेस को 80 सीटों पर जीत मिली है. पार्टी के 32 विधायक मुसलमान हैं. मंत्री फिरहाद हकीम भी चुनाव जीत गए हैं, जो कोलकाता पोर्ट सीट से लड़ते हैं. फिरहाद हकीम को ममता बनर्जी का करीबी नेता माना जाता है.

बंगाल में इस बार महिला विधायकों की संख्या में भी कमी आई है. खुद ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से चुनाव हार गई हैं. बंगाल में इस बार 34 महिला विधायक चुनकर सदन पहुंची हैं. पिछली बार महिला विधायकों की संख्या 46 थी. तृणमूल कांग्रेस के सिंबल पर 14 महिला जीतकर विधानसभा पहुंची हैं.

 BJP’s storm in Bengal – इसी तरह बीजेपी के सिंबल पर 20 महिला जीतकर विधानसभा पहुंची हैं. बीजेपी ने इस बार 33 महिलाओं को टिकट दिया था. हालांकि, उसके 13 महिला उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा.

 

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