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    Home » आज आषाढ़ मास का रवि प्रदोष व्रत, जानें प्रदोष काल पूजा विधि और महादेव की कृपा पाने के विशेष उपाय

    आज आषाढ़ मास का रवि प्रदोष व्रत, जानें प्रदोष काल पूजा विधि और महादेव की कृपा पाने के विशेष उपाय

    July 26, 2026 धार्मिक 4 Mins Read
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    Ravi Pradosh Vrat July 2026: आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी रवि प्रदोष का पावन व्रत रखा जा रहा है। भगवान शिव को समर्पित यह व्रत सनातन धर्म के भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महादेव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहने और भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद मिलने की मान्यता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल (सूर्यास्त के आसपास का समय) में भगवान शिव की पूजा करने से अनंत पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत के दिन भक्त दिनभर निराहार या फलाहार व्रत रखते हैं और शाम के समय प्रदोष काल में शिवलिंग का पंचामृत व जल से अभिषेक कर भोलेनाथ की पूजा करते हैं। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई आराधना से महादेव अपने भक्तों के सभी दैहिक, दैविक और भौतिक कष्ट दूर करते हैं।

    🛕 प्रदोष काल में इस विधि से करें भोलेनाथ की पूजा, प्रसन्न होंगे शिव-पार्वती

    प्रदोष व्रत में शाम के समय भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन शाम को प्रदोष काल में पुनः स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें और पूजा की तैयारी करें। सबसे पहले भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें। इसके बाद शिवलिंग पर शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करें। आप चाहें तो शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, शक्कर और देशी घी (पंचामृत) से अभिषेक भी कर सकते हैं।

    अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग और ताजे फूल अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय माना जाता है; बेलपत्र चढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखें कि पत्ते कटे-फटे न हों और पूरी तरह साफ व साबुत हों। इसके बाद धूप और दीप प्रज्वलित कर भगवान शिव की आरती करें और अपनी मनोकामना महादेव के समक्ष रखें।

    ✨ रवि प्रदोष के दिन करें ये 4 खास और आसान उपाय, बनी रहेगी सुख-समृद्धि

    रवि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कुछ आसान और प्रभावशाली उपाय किए जा सकते हैं। मान्यता है कि इन उपायों को पूर्ण श्रद्धा के साथ करने से महादेव की कृपा तुरंत प्राप्त होती है:

    • 💧 शिवलिंग पर चढ़ाएं जल और बेलपत्र: रवि प्रदोष के दिन सुबह और शाम के समय प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल अर्पित करें। इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए बेलपत्र चढ़ाएं। मान्यता है कि इससे भोलेनाथ तुरंत प्रसन्न होते हैं।

    • 🧘 महामृत्युंजय मंत्र का करें जाप: इस दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना बेहद शुभ और कष्ट निवारक माना जाता है। यदि संभव हो तो शिव मंदिर में बैठकर रुद्राक्ष की माला से मंत्र का जाप करें। यह स्वास्थ्य लाभ और दीर्घायु के लिए विशेष फलदायी होता है।

    • 🤝 जरूरतमंदों को करें दान: इस पावन दिन अपनी क्षमतानुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अन्य जरूरी सामग्री का दान करें। दान करने से मानसिक शांति मिलती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

    • 🪔 शाम के समय करें शिव आरती: प्रदोष काल में पूजा पूर्ण करने के बाद भगवान शिव की आरती अवश्य करें। यदि घर में पूजा कर रहे हैं, तो परिवार के सभी सदस्य मिलकर शिव आरती करें और परिवार की आरोग्यता व समृद्धि की प्रार्थना करें।

    ☀️ रवि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व, सूर्यदेव और शिवजी के आशीर्वाद से मिलता है आरोग्य

    रविवार का दिन भगवान सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है, जबकि प्रदोष तिथि भगवान शिव की आराधना का सबसे उत्तम अवसर होती है। ऐसे में जब प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ता है, तो इसे ‘रवि प्रदोष’ कहा जाता है और इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

    धार्मिक मान्यता है कि रवि प्रदोष व्रत रखने से सेहत और स्वास्थ्य से जुड़ी तमाम परेशानियां दूर होती हैं तथा व्यक्ति को जीवन में तेज, ऊर्जा और असीम आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव और सूर्यदेव की पूजा करने से भक्तों को दीर्घायु, निरोगी काया और सुखी जीवन का वरदान मिलता है।

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