झज्जर : जिस खाकी वर्दी को पहनकर देश सेवा करने और अपने परिवार का सहारा बनने का सपना एक 19 वर्षीय युवा रात-दिन देख रहा था, उसी व्यवस्था में इस्तेमाल हुई पैलेट गन के छर्रों ने उसकी आंखों के आगे अंधेरा कर दिया। यह पीड़ादायी कहानी है दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के (eyesight lost due to pellet gun) छर्रे लगने से अपनी आंख की रोशनी गंवाने वाले साहिल लोहचब की, जो मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले के भूपनियां गांव के निवासी हैं।

eyesight lost due to pellet gun – साहिल के पिता दीपक पोलियो के कारण दिव्यांग हैं। आर्थिक तंगी के चलते साहिल ने बचपन से ही पढ़ाई के साथ-साथ परिवार का हाथ बंटाना शुरू किया। घर में आय का मुख्य स्रोत टैक्सी चलाना ही था। साहिल ने 10-12 वर्ष की उम्र में ही ड्राइविंग सीख ली थी। वे रोजाना 4 से 5 घंटे टैक्सी चलाकर घर का खर्च और अपने दो छोटे भाइयों (कक्षा 6वीं और 9वीं) की पढ़ाई का जिम्मा संभालते थे।

20 जुलाई को जंतर-मंतर पर बदली जिंदगी 

नीट (NEET) पेपर लीक मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र साहिल विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। साहिल का कहना है कि सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल की गई पैलेट गन के छर्रे सीधे उनकी दाईं आंख और चेहरे पर लगे। छर्रे लगने से उनकी दाईं आंख की रोशनी पूरी तरह चली गई और चेहरे पर गंभीर चोटों के निशान रह गए। घटना के बाद दिल्ली एम्स (AIIMS) में उनका लंबा इलाज चला।

 

 

 

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