पहला बच्चा हर माता पिता के लिए जिन्दगी का एक नया पड़ाव होता है| कई माता पिता इस पड़ाव में कई गलतियां भी करते हैं और इन्ही गलतियों से बचने के लिए पेरेंट्स, पेरेंटिंग टिप्स भी ढूँढतें है| ज़िंदगी में कोई भी कार्य जो आप पहली बार करते है उसके लिए सभी को निर्देशों की आवश्यकता पड़ती ही है उसी के बाद आप किसी कार्य में प्रवीण होते है| आज हम आपको इस लेख में बताएंगे पेरेंटिंग टिप्स जिसके अंतर्गत बच्चे के जन्म के उपरांत किन बातों का ध्यान रखना है:-

पेरेंटिंग टिप्स : नये माता पिता के लिए

जल्दी घबराएं नहीं

कई नये माता पिता जल्दी घबरा जातें हैं| बच्चे के उल्टी करने पर या रोने पर पेरेंट्स घबरा जाते हैं और पैनिक होने लगते हैं इसी कारण वह अपने बच्चे के पहले साल को ठीक से नहीं जी पाते| इसी घबराहट को बच्चा भांप लेता है और इससे बच्चा आगे चल के ज़ीद्दी भी बन सकता है|

हर वक़्त यह सोचते रहना कि कहीं इसे भूख तो नहीं लगी या कहीं इसे ज़्यादा तो नहीं खिला दिया, क्या ज़्यादा मल मूत्र कोई खतरे की घंटी तो नहीं और क्या यह ज़्यादा रो रहा है या बिल्कुल ही नहीं रो रहा? यह आपके और आपके बच्चे के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है| पेरेंटिंग का सबसे इम्पोर्टेन्ट पॉइंट है कि आप अपने बच्चे की जिन्दगी का हर पड़ाव जी भर कर जियें|

बच्चे को रोने दीजिये

कई नए माता पिता अपने बच्चे को रोने नहीं देते, उनको लगता है कि बच्चे का रोना अच्छा नहीं होता या वह कुछ गलती कर रहें हैं जिस कारण बच्चा रो रहा है| सभी पेरेंट्स को यह लगता है कि उनका बच्चा न रोये यह उनकी ज़िम्मेदारी है| कई पीडियाट्रिशन का कहना है कि बच्चों को रोने देना चाहिए| अब आप सोच रहे होंगे कि यह कैसा डॉक्टर है जो बच्चों को रुलाना चाहता है| परन्तु यह सही है बच्चे रोने के लिए ही बने होते है|

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उनको आप कितना ही अच्छे से डाइपर और खाना खिलाकर क्यों ही न बिठा दें वह फिर भी रोयेंगे| बच्चे बात नहीं कर पाते है और वो रोकर ही अपनी बात दूसरों तक पहुंचाते हैं पर यदि आपका बच्चा 1 घंटे से ज्यादा रो रहा है और उसको उल्टियाँ, या बुखार है तो अपने पीडियाट्रिशन को अवश्य फ़ोन करें|

बच्चे को नींद पूरी करने दें

कई माताएं अपने बच्चे को नींद से जगा कर स्तनपान करवाती हैं परन्तु बच्चे को पूरी रात ठीक से सोने देना चाहिए| माताओं को लगता है कि स्तन का दूध काफी पतला होता है जिससे बच्चे का पेट नहीं भरता और वह उसे मध्य रात्रि में उठाकर एक और बार स्तनपान करवाती हैं| परन्तु यह बहुत बड़ी ग़लतफहमी होती है क्योंकि स्तन का दूध इतना पोष्टिक होता है कि बच्चा पूरी रात सुकून से काट सकता है और माताओं को भी पूरी रात सोकर अपनी थकान मिटानी चाहिए।

उलटी और उगलने में कंफ्यूज न हों

यह भी पेरेंटिंग टिप्स का अहम पहलू है| पीडियाट्रिक्स का कहना है कि उल्टी बच्चों को तब होती है जब उनके पेट में कोई इन्फेक्शन हुआ हो न की खाना खिलते वक़्त| और इस इन्फेक्शन के कारण उल्टियाँ हर 30 से 40 मिनट के अन्दर होती है जबकि बच्चे केवल खाना खिलाते वक़्त ही उगलते हैं|

शिशु से बात करें

यह सुनने में अजीब लग सकता है लेकिन बच्चे की मां को अपने शिशु से बात करनी चाहिए| नवजात के मस्तिष्क विकास के लिए यह जरूरी होता है| नवजात शिशु का ब्रेन विकास के क्रम में रहता है ऐसे में उसे ध्वनि और शब्दों की आवाज सक्रिय करती है|

बेबी फीडिंग बोतल की सफाई जरूरी

अगर आप स्तनपान नहीं कराती हैं, तो बेबी फीडिंग बोतल की सफाई पर विशेष ध्यान दें| नियमित तौर पर फीडिंग बोतल को स्टरलाइज़ करें| दूध पिलाने से पहले बोतल को अच्छी तरह से धो लें| निप्पल की सफाई ठीक तरह से करें| यह बच्चे को बीमार कर सकता है|

नवजात शिशु को कैसे नहलाएं

वैसे तो जब तक बच्चे की गर्भनाल (umbilical cord) रहती है तब तक बच्चे को नहीं नहलाना चाहिए| जब गर्भनाल गिर जाए तब स्पंज स्नान से शुरुआत करनी चाहिए| बच्चे को नहलाते समय हमेशा सावधानी और सफाई का ध्यान रखें| शिशु को नहलाना क्यों है जरूरी और नहलाने का सही तरीका? बच्चे के जन्म के बाद कुछ दिनों तक गर्भनाल की देखभाल बहुत जरूरी होती है| लगभग 10 दिनों तक गर्भनाल बच्चे के साथ जुड़ी रहती है| इन दस दिनों में गर्भनाल की ठीक से सफाई जरूर करें| डॉक्टर द्वारा सुझाए गये पाउडर या क्रीम जरूर लगाएं|

बच्चे के कमरे को साफ़ रखें

कुछ लोग खिलौने बच्चे के बहुत करीब रखते हैं| बेबी केयर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सॉफ्ट खिलौने बच्चों की नींद में खलल डाल सकते हैं| हार्ड खिलौनों से जहां बच्चों को चोट लगने का डर रहता है, वहीं मुलायम खिलौनों से एलर्जी होने का डर रहता है| हर मां बनने वाली महिला और घर वाले इस बात को हमेशा ध्यान में रखें| बच्चे का कमरा हमेशा साफ रहना चाहिए| बाहर से आने वाले लोगों को अपनी सफाई के बाद ही बच्चे के रूम में जाएं| कमरे में धूल न जाए इसका पूरा ध्यान रखना चाहिए| कमरे में गंदगी होने से बच्चे को एलर्जी हो सकती है|

मां हेल्दी डाइट ले

इन सभी बेबी केयर टिप्स के साथ मां को अपनी डाइट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है क्योंकि अगर मां हेल्दी नहीं रहेगी तो बच्चे का स्वास्थ्य भी खराब होता है| गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को जितनी देखभाल की ज़रुरत पड़ती है, उतनी ही देखभाल और पोषण की ज़रुरत उन्हें डिलीवरी के बाद भी पड़ती है| ऐसा इसलिए क्योंकि शिशु के जन्म के दौरान माँ का शरीर पूरी तरीके से टूट चूका होता है| प्रेगनेंसी के बाद माँ को सौंफ का पानी, खसखस के लड्डू, गोंद के लड्डू, साबुत अंकुरित अनाज व पंजीरी जैसी चीज़े खाने को कहा जाता है|

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बच्चे के आलावा अपने रिश्ते पर भी ध्यान दें

कई माता पिता अपने पहले बच्चे के बाद अपने रिश्ते पर ध्यान नहीं देते| बच्चे के आने के बाद पति पत्नी में काफी दूरियां आ जाती है जिसके कारण एक छोटी सी फूट भी बड़ी लड़ाई का रूप ले लेती है| इसी कारण आपको बच्चे के साथ साथ अपने रिश्ते पर भी ध्यान देना चाहिए| कई बार बच्चा माता पिता के बिच के तनाव को भी भांप लेता है इसलिए अपने बच्चे के सामने अत्यधिक लड़ाई न करें और लड़ाई न करने का मतलब यह नहीं हैं कि आप ज़रा भी नहीं झगडे क्योंकि यह आपके रिश्ते के लिए खतरा बन सकता है| इसलिए अपने बच्चे व अपने रिश्ते को बैलेंस करके चलें|

यह थे कुछ पेरेंटिंग टिप्स जिससे आप अपने पहले बच्चे के जीवन के हर पड़ाव को आनंदपूर्वक जी सकेंगे और साथ ही एक अच्छे माता पिता होने का फ़र्ज़ भी निभा पाएंगे| बाल रोग विशेषज्ञ से बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में जरूरी जानकारी और सावधानी भी जान लें|

Image Source : happyfamilyorganics.com

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