नई दिल्ली : पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी कूटनीतिक और रणनीतिक नीति में बड़ा बदलाव किया है। दशकों के संयम को त्यागते हुए, भारत सरकार ने अब ‘सिंधु जल संधि’ (Indus Waters Treaty) के दायरे में रहते हुए अपने हिस्से के पानी के पूर्ण उपयोग की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं।

भारत ने चिनाब नदी प्रणाली से जुड़े जल संसाधनों के अधिकतम दोहन की योजना तैयार की है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति क्षेत्र में चंद्रा नदी के जल को सुरंगों के माध्यम से व्यास नदी प्रणाली से जोड़ने की प्रक्रिया को मंजूरी दी गई है। यह अतिरिक्त जल न केवल राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों के किसानों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि ऊर्जा उत्पादन में भी नई गति लाएगा।

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Indus Waters Treaty – अब तक सिंधु जल संधि की सीमाओं के कारण भारत सलाल और बगलिहार जलविद्युत परियोजनाओं के जलाशयों से गाद (Silt) निकालने में बाधित था। पाकिस्तान हमेशा निचले गेट्स को खोलने का विरोध करता रहा था। अब भारत सरकार इन जलाशयों में व्यापक ‘डीसिल्टिंग, ड्रेजिंग और फ्लशिंग’ का कार्य करने जा रही है। इससे जलाशयों की जल भंडारण क्षमता बढ़ेगी और भारत बिजली उत्पादन करने में अधिक सक्षम होगा।

🛡️ पाकिस्तान के लिए स्पष्ट रणनीतिक संदेश

भारत का यह कदम केवल जल प्रबंधन नहीं, बल्कि पाकिस्तान को एक कड़ा रणनीतिक संदेश है। यह स्पष्ट संकेत है कि यदि पड़ोसी देश आतंकवाद को अपनी नीति बनाए रखेगा, तो भारत अपने राष्ट्रीय हितों और संसाधनों पर कोई समझौता नहीं करेगा। यह आत्मनिर्भरता और सख्त राष्ट्रीय संकल्प की ओर भारत का एक बड़ा कदम है।

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