धार्मिक

नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है. यह नौ दिनों का पर्व मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की आराधना का विशेष समय है.

महालया अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है.यह दिन पितृ पक्ष के अंत और दुर्गा पूजा की शुरुआत का प्रतीक है. महालया अमावस्या पितरों को श्रद्धांजलि देने के लिए खास माना गया है.

पितृपक्ष का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. जिसमें अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी जाती है. मान्यता है कि इस समय किए गए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म से पितृ तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं.

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के शांत और हरे-भरे माहौल में, तमसा नदी के किनारे स्थित है एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर जो पौराणिक कथाओं के लिए विख्यात है.

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में स्थित हत्या हरण तीर्थ, पितृपक्ष के दौरान लोक और परलोक के बीच की दूरी को समाप्त कर देता है.

पितृपक्ष को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र काल माना गया है. इस दौरान हर व्यक्ति अपने पितरों का स्मरण कर श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करता है ताकि पितृ आत्माएं प्रसन्न होकर आशीर्वाद दें.

पंचांग के अनुसार हर साल महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल अष्टमी से शुरू होता है और आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को इस व्रत का समापन होता है.

 हिंदू धर्म में पितृपक्ष का समय बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है. इस दौरान अपने पितरों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं.

दिल्ली के प्राचीनतम और प्रसिद्ध मां कालका मंदिर में यह नियम लागू नहीं होता. यहां ग्रहण चाहे सूर्य का हो या चंद्रमा का, भक्तों के लिए दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं.

पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर 2025 से हो रही है और यह 21 सितंबर 2025 तक चलेगा. यह 15 दिनों की वह अवधि है जब दिवंगत पूर्वजों को याद करते हैं और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करते हैं.