भोपाल: खानूगांव की ऐतिहासिक रियाज मंजिल और करीब आठ एकड़ जमीन को ‘शत्रु संपत्ति’ मानकर की जा रही कार्रवाई में सोमवार को नया मोड़ आ गया। 25 नोटिसधारियों ने बैरागढ़ एसडीएम के सामने अपने जवाब और दस्तावेज पेश कर दिए। इन जवाबों में संपत्ति के स्वामित्व से लेकर वर्ष 2024 में जारी बताए जा रहे शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र की प्रामाणिकता तक पर सवाल उठाए गए हैं। सबसे अहम दस्तावेज के रूप में वर्ष 2005 का नामांतरण आदेश सामने आया है, जिसमें राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर जमीन का नाम साजिदा सुल्तान के नाम दर्ज होने का उल्लेख है। मामले की अगली सुनवाई अब छह अक्टूबर को होगी।

📄 वर्ष 2005 का नामांतरण आदेश पेश, 2020 की राजस्व जांच बनी मुख्य आधार

जानकारी के अनुसार नोटिसधारी मोहम्मद यूसुफ खान की ओर से अधिवक्ता खालिद हफीज ने वर्ष 2005 का नामांतरण आदेश पेश किया। उनका कहना है कि करीब 20 वर्ष पहले राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर खसरा नंबर 42 का नामांतरण साजिदा सुल्तान के नाम किया गया था। ऐसे में अब उसी भूमि को आफताब जहां बेगम की संपत्ति बताकर ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित करने का आधार क्या है, यह स्पष्ट होना चाहिए। आपत्तियों में वर्ष 2020 की राजस्व कार्यवाही को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। राजस्व प्रकरण क्रमांक 337/अ-6/2018-19 में तत्कालीन तहसीलदार, संत हिरदाराम नगर ने खसरा नंबर 42 के संबंध में जांच के बाद आफताब जहां के पक्ष में हिबानामा के आधार पर किए गए नामांतरण दावे को सिद्ध नहीं माना था। नोटिसधारियों का सवाल है कि जब पूर्व राजस्व जांच में आफताब जहां का मालिकाना हक स्थापित नहीं माना गया, तो वर्ष 2024 में इसी संपत्ति को उनके स्वामित्व की मानकर शत्रु संपत्ति घोषित करने का आधार क्या बना?

📂 2024 के प्रमाण-पत्र का मूल रिकॉर्ड मुंबई कार्यालय से बुलाने की मांग

आपत्तियों में 29 अप्रैल 2024 के शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र की प्रामाणिकता स्पष्ट करने की मांग की गई है। अधिवक्ता खालिद हफीज के अनुसार प्रमाण-पत्र की उपलब्ध प्रति की सत्यता और उसके आधार की जांच के लिए शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय, मुंबई से संबंधित मूल/प्रमाणित रिकॉर्ड बुलाया जाना चाहिए। इसमें फाइल नंबर 16-01-03/84 की नोटशीट, अनुमोदन आदेश, संपत्ति सत्यापन रिपोर्ट और स्वामित्व संबंधी दस्तावेज शामिल हैं।

⚖️ हाई कोर्ट का आदेश भी बना नोटिसधारियों के लिए ढाल

मामला हाई कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। आपत्तियों में बताया गया है कि 24 सितंबर को हाई कोर्ट ने अगली तारीख तक संबंधित कारण बताओ नोटिस के आधार पर कोई बलपूर्वक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। नोटिसधारियों ने इसी आदेश का हवाला देते हुए बेदखली या कब्जा लेने जैसी कार्रवाई पर रोक बनाए रखने की मांग की है।

🔍 विवाद अब कब्जे से ज्यादा ‘मालिकाना आधार’ पर केंद्रित

इस मामले में अब असली सवाल यह नहीं रह गया है कि जमीन पर कौन काबिज है, बल्कि यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में मालिकाना हक की पूरी कड़ी आखिर किसके नाम और किस दस्तावेज से जुड़ती है। 2005 का नामांतरण, 2020 की राजस्व जांच और 2024 का शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र—इन तीनों रिकॉर्ड का आपसी मिलान ही विवाद की तस्वीर साफ कर सकता है। अब छह अक्टूबर की सुनवाई में प्रशासन इन दस्तावेजों और आपत्तियों पर क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

❓ इन छह महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने की मांग

  • खसरा नंबर 42 का वास्तविक विधिक स्वामी कौन था?

  • 2005 के नामांतरण में साजिदा सुल्तान का नाम किस आधार पर दर्ज हुआ?

  • 2020 में आफताब जहां का नामांतरण दावा क्यों सिद्ध नहीं माना गया?

  • 2024 में शत्रु संपत्ति घोषित करने का नया आधार क्या था?

  • 29 अप्रैल 2024 का प्रमाण-पत्र किन मूल दस्तावेजों पर जारी हुआ?

  • क्या मुंबई स्थित मूल शत्रु संपत्ति रिकॉर्ड से पूरी स्थिति स्पष्ट होगी?

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