उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना तय हुआ है। मौजूदा दलीय स्थिति के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 7 सीटों पर और समाजवादी पार्टी (सपा) 2 सीटों (mathematics of 10 rajya sabha seats) पर सहज रूप से जीत दर्ज करने की स्थिति में हैं। हालांकि, असली सियासी घमासान अब 10वीं सीट को लेकर छिड़ गया है।
mathematics of 10 rajya sabha seats – सूत्रों के मुताबिक, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 10वीं सीट पर भी अपना प्रत्याशी उतारने का मन बना लिया है। इस तीसरी सीट के लिए पार्टी में कई प्रमुख नामों की चर्चा चल रही है, जिनमें पश्चिमी यूपी के गुर्जर नेता चौधरी रूद्रसेन, पूर्व केंद्रीय मंत्री सलीम शेरवानी और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद सिंह गोप के नाम प्रमुखता से शामिल हैं।
सपा ने अपनी दो सुरक्षित सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा पहले ही कर दी है। पार्टी विधायकों की बैठक में प्रोफेसर रामगोपाल यादव और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के नाम पर मुहर लगा दी गई है। वहीं, तीसरी सीट के दावेदारों के समक्ष अखिलेश यादव ने दो टूक शर्त रखी है कि जो नेता आवश्यक अतिरिक्त वोट और दूसरे दलों के विधायकों से समर्थन जुटाने का सामर्थ्य रखता हो, पार्टी उसी पर दांव लगाएगी।
जानिए जीत का जादुई आंकड़ा
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें रिक्त हैं, जिनमें से वर्तमान में 6 सीटें हैं। इस प्रकार सदन की प्रभावी सदस्य संख्या 397 है। 397 सदस्यों के आधार पर 10 सीटों के चुनाव में प्रत्येक प्रत्याशी को जीत हासिल करने के लिए कम से कम 37 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता होगी। विधानसभा में बीजेपी के अपने 256 विधायक हैं। सहयोगी दलों (अपना दल एस, निषाद पार्टी, रालोद, सुभासपा) को मिलाकर एनडीए का आंकड़ा 292 तक पहुंचता है।
बीजेपी के पक्ष में मजबूत आंकड़े
जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के 2 विधायकों के समर्थन के साथ एनडीए का आंकड़ा 294 तक पहुंच जाता है। 37 के कोटे के हिसाब से बीजेपी गठबंधन 259 वोटों के बल पर 7 सीटें निर्विरोध जैसी स्थिति में जीत सकता है। 8 सीटों के लिए कुल 296 वोटों की दरकार होगी। 294 के संख्या बल के साथ एनडीए को आठवीं सीट सुरक्षित करने के लिए मात्र 2 अतिरिक्त मतों की आवश्यकता है। पिछली बार सपा के 4 विधायकों द्वारा की गई क्रॉस वोटिंग को देखते हुए बीजेपी का पलड़ा काफी भारी नजर आ रहा है।
