मुंबई : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 14 फीट से अधिक ऊंचाई पर बने आवासीय निर्माणों को लेकर सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। यह विवाद अब केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उन हजारों गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के भविष्य और पुनर्वास से जुड़ चुका है, जिनके (Mumbai Illegal Construction) आशियाने इस संभावित प्रशासनिक कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।
Mumbai Illegal Construction – मामले को लेकर विपक्षी दलों—कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने राज्य की महायुति सरकार और बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष का स्पष्ट कहना है कि किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाने से पूर्व प्रभावित लोगों के पुनर्वास और पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) की ठोस व पारदर्शी योजना बनाई जानी चाहिए।
कांग्रेस पार्टी ने कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की है कि यदि किसी निर्माण पर कार्रवाई की जाती है, तो वहां पीढ़ियों से रह रहे निर्धन परिवारों को बेघर करने के बजाय पहले उन्हें उचित आवास मुहैया कराया जाए। वहीं शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया है कि नियमों की आड़ में गरीब और निम्न-मध्यम वर्गीय तबके को बेवजह डराया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गरीब और मध्यम वर्ग को भयभीत न करे प्रशासन
कांग्रेस नेता अरशद आजमी ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रशासन को पहले प्रभावित बस्तियों के पुनर्विकास और परिवारों के पुनर्वास का स्पष्ट खाका पेश करना चाहिए। जब तक हर परिवार के सिर पर छत सुरक्षित न हो, तब तक किसी भी मकान पर हथौड़ा या बुलडोजर चलाना अनुचित है। शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व महापौर किशोरी पेडनेकर ने पार्टी की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा, “हम किसी भी गैर-कानूनी या अवैध निर्माण के पक्षधर नहीं हैं। लेकिन कार्रवाई के नाम पर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को भयभीत करना और उनके आशियाने छीनना सरासर अन्याय है।”
