नर्मदापुरम/भोपाल : अयोध्या राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख सेनानी रहे ‘भोजपाली बाबा’ ने अपनी 7 सफल नर्मदा परिक्रमाएं पूरी करने के बाद अब 8वीं बार मां नर्मदा की पवित्र परिक्रमा शुरू की है। मूल रूप (Bhojpali Baba Ravindra Gupta) से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रहने वाले भोजपाली बाबा का वास्तविक नाम रविंद्र गुप्ता है।
Bhojpali Baba Ravindra Gupta – उच्च शिक्षित पृष्ठभूमि से आने वाले बाबा ने दर्शनशास्त्र और मनोविज्ञान (Psychology) में ‘डबल एमए’ किया है और इसके बाद कानून की डिग्री (LLB) हासिल कर लगभग 5 वर्षों तक वकालत की। आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेने वाले एक सफल वकील से संन्यास की राह चुनने तक का उनका यह सफर अध्यात्म, सेवा और राष्ट्रनिष्ठा का एक अनूठा संगम है।
राम मंदिर आंदोलन और आजीवन अविवाहित रहने का कठोर संकल्प
1992 आंदोलन से जुड़ाव: दिसंबर 1992 से वे सक्रिय रूप से राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे। उस समय वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) भोपाल के महानगर संयोजक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
विवाह न करने की प्रतिज्ञा: आंदोलन के दौरान उन्होंने यह कठोर संकल्प लिया था कि जब तक अयोध्या में प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर नहीं बन जाएगा, तब तक वे आजीवन विवाह नहीं करेंगे।
मंदिर ट्रस्ट और वर्तमान ‘जैन-जी’ आंदोलन पर भोजपाली बाबा के विचार
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मंदिर विवाद पर दर्द: राम मंदिर आंदोलन से जुड़े आर्थिक विवादों पर दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आंदोलन के संघर्ष में तपे हुए सच्चे कारसेवकों की आत्माएं आहत हैं; ट्रस्ट में ऐसे चेहरों का होना चिंताजनक है जो आंदोलन के भावनात्मक दौर से कभी नहीं जुड़े थे।
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आंदोलनों पर प्रतिक्रिया: वर्तमान में युवाओं के बीच चल रहे आंदोलनों पर उन्होंने कहा कि समाज को भड़काने वाले तत्वों का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण नहीं, बल्कि राजनीतिक सत्ता के लिए माहौल तैयार करना है।
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