राजधानी दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और बिहार में गर्मी ने मई महीने में ही लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. अब मौसम विभाग ने आने वाले दिनों को लेकर और भी गंभीर चेतावनी जारी की है. दरअसल, उत्तर भारत के इन राज्यों में इस साल गर्मी 25 मई से 2 जून तक चरम पर रहेगी. इस (this is just a summer trailer) समय को ‘नौतपा’ के नाम से जाना जाता है. हर साल नौतपा की तारीख बदलती रहती है. इन नौ दिनों में सूरज इतना तेज चमकता है कि दिन के समय सड़कें भट्टी की तरह तपती हैं. रात में भी उमस से नींद नहीं आती.

 नौतपा में क्यों पड़ती है भीषण गर्मी?

हर साल मई के आखिर और जून की शुरुआत में पड़ने वाला नौतपा लोगों के लिए भीषण गर्मी लेकर आता है. इस दौरान तापमान कई राज्यों में 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाता है. दिन में तेज धूप, रात में गर्म हवाएं और बढ़ती उमस लोगों का जीना मुश्किल कर देती है. इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ कई वैज्ञानिक कारण भी जिम्मेदार हैं.

सूखी जमीन और लू बढ़ाती है परेशानी

लगातार बढ़ती गर्मी के कारण जमीन की नमी लगभग खत्म हो जाती है. सूखी मिट्टी बहुत तेजी से गर्म होती है और वातावरण में गर्मी फैलाती है. पेड़-पौधों में भी नमी कम होने लगती है, जिससे हवा और अधिक शुष्क हो जाती है. इसी दौरान राजस्थान और रेगिस्तानी इलाकों से आने वाली गर्म पछुआ हवाएं यानी लू उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों को झुलसा देती हैं. ये हवाएं तापमान को और अधिक बढ़ा देती हैं.

हीट स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा

भीषण गर्मी और उमस का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ता है. डॉक्टरों के अनुसार, नौतपा के दौरान हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, थकान और चक्कर आने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को इस दौरान अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.

नौतपा के बाद मिलती है राहत

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, नौतपा खत्म होने के बाद दक्षिण-पश्चिम (this is just a summer trailer) मानसून केरल में दस्तक देता है और धीरे-धीरे पूरे देश में आगे बढ़ता है. मानसून की पहली बारिश के साथ तापमान में गिरावट आने लगती है और जमीन भी ठंडी हो जाती है. यही कारण है कि नौतपा को गर्मी का सबसे चरम दौर माना जाता है.

Share.
Exit mobile version