नई दिल्ली : देश की सर्वोच्च अदालत ने 49 करोड़ रुपये के एक बहुत बड़े और बहुराज्यीय ठगी (Investment Chit Fund Scam) के मामले में मुख्य आरोपियों की ओर से दायर विशेष ट्रांसफर याचिका पर सुनवाई करने से पूरी तरह इनकार कर दिया है। आरोपियों द्वारा दायर इस याचिका में देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज की गई (Supreme Court Verdict) अलग-अलग प्राथमिकियों (FIR) को एक साथ जोड़कर (Club) एक ही जगह सुनवाई करने की मांग की गई थी।
⚖️ कोर्ट ने कहा—न्याय प्रणाली में पीड़ितों के अधिकार सबसे पहले
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने यह सख्त फैसला मामले के मुख्य आरोपी उपेंद्र नाथ मिश्रा और काली प्रसाद मिश्रा की ओर से दायर ट्रांसफर याचिका पर कानूनी सुनवाई के बाद दिया है। इन दोनों शातिर आरोपियों के खिलाफ देश के भोले-भाले निवेशकों से कथित तौर पर 49 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि ठगने के कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। कोर्ट ने साफ-साफ शब्दों में स्पष्ट किया कि हमारी लोकतांत्रिक न्याय प्रणाली को किसी भी वित्तीय अपराध के आरोपितों की व्यक्तिगत सुविधा के बजाय, अपनी गाढ़ी कमाई खो चुके पीड़ित निवेशकों के कानूनी अधिकारों को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए।
💼 कड़े रुख को देखते हुए बैकफुट पर आए आरोपी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने आरोपियों की ओर से पेश हुए देश के वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी की तकनीकी दलीलों और तर्कों से रत्ती भर भी सहमति नहीं जताई। अदालत की पीठ का रुख इस आर्थिक अपराध को लेकर बेहद कड़ा और सख्त था। अदालत की इस तीखी और गंभीर टिप्पणियों को भांपते हुए आरोपियों के वकील ने (Supreme Court Verdict) अंततः अपनी ट्रांसफर याचिका को बिना शर्त वापस लेने में ही अपनी भलाई समझी।
