नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की आबोहवा ज्यादातर समय खराब और चिंताजनक श्रेणी में बनी रहती है। खासकर अक्टूबर और नवंबर के महीनों में हवा की गुणवत्ता (AQI) बेहद खतरनाक स्तर तक गिर जाती है। बढ़ते वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सरकार की ओर से तमाम कड़े कदम भी उठाए जाते रहे हैं, लेकिन वे अक्सर नाकाफी ही साबित होते हैं। अब राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने खुलासा किया है कि दिल्ली में गर्मी के सीजन में मकानों व भवनों के निर्माण और ध्वस्तीकरण (Construction and Demolition) की वजह से प्रदूषण सबसे ज्यादा बढ़ता है, जबकि सर्दियों में वाहनों के धुएं और बायोमास जलने से हवा जहरीली हो जाती है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्द्धन सिंह ने राज्यसभा में अपने लिखित जवाब में बताया कि दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए ‘दिल्ली-NCR में PM2.5 और PM10 के मुख्य स्रोतों की पहचान’ के लिए सोर्स अपोर्शनमेंट (स्रोत योगदान आकलन) अध्ययन कराया गया था। इस अध्ययन से प्रदूषण के मौसमी स्रोतों को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य खुलकर सामने आए हैं।
🏗️ गर्मियों में कंस्ट्रक्शन और उड़ती धूल बनती है प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह
संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, गर्मी के सीजन में वायु प्रदूषण बढ़ाने के लिए धूल-मिट्टी के साथ-साथ कंस्ट्रक्शन और तोड़-फोड़ की गतिविधियां सबसे अधिक जिम्मेदार होती हैं।
गर्मियों के कुल प्रदूषण में इनका हिस्सा 25 से 31 फीसदी तक होता है। इसके बाद दूसरे नंबर पर रोड ट्रांसपोर्ट आता है, जिसका कुल वायु प्रदूषण में 18 से 21 फीसदी योगदान रहता है।
तीसरे स्थान पर ट्रांसपोर्ट, इंडस्ट्री और बायोमास जलाने आदि से निकलने वाली गैसें जिम्मेदार होती हैं, जिनकी हिस्सेदारी 16 से 19 फीसदी दर्ज की गई है। चौथे स्थान पर म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट, घरेलू कचरा और पराली/फसल के अवशेषों को जलाने से 11 से 14 फीसदी प्रदूषण फैलता है। इसके अलावा फैक्ट्रियों और उद्योगों से निकलने वाली गैसें 9 से 15 फीसदी तक प्रदूषण के लिए जिम्मेदार बनती हैं।
🚗 सर्दियों में गाड़ियों का धुआं, बायोमास और कचरा जलाना बिगाड़ता है दिल्ली की आबोहवा
दूसरी ओर, जाड़े (सर्दियों) के सीजन में प्रदूषण के समीकरण पूरी तरह बदल जाते हैं।
ठंड के दिनों में बायोमास जलाने, उद्योगों और अन्य स्रोतों से निकलने वाला धुआं कुल प्रदूषण में 24 से 28 फीसदी हिस्सेदारी रखता है। सर्दियों में सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआं यानी ट्रांसपोर्ट सेक्टर वायु प्रदूषण में 19 से 24 फीसदी का बड़ा योगदान देता है।
इसके साथ ही सॉलिड वेस्ट, घरेलू कचरा और फसल अवशेषों (पराली) के जलाने से दिल्ली-एनसीआर की हवा सबसे ज्यादा खराब होती है, जिसका हिस्सेदार 17 से 23 फीसदी है। वहीं, सर्दियों में सड़क की मिट्टी, कंस्ट्रक्शन और तोड़-फोड़ से उड़ने वाली धूल का योगदान गर्मी की तुलना में घट जाता है और यह 10 से 18 फीसदी के बीच रहता है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद CAQM ने कराया अध्ययन, मौसम के हिसाब से तय होंगे कड़े नियम
इससे पहले गैस चैंबर बनी राजधानी दिल्ली की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए 6 जनवरी को आदेश जारी किया था।
अदालत ने ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ (CAQM) को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों की गहन पहचान करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद CAQM ने वायु गुणवत्ता विशेषज्ञों की एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसके अनुसार दिल्ली में अलग-अलग मौसमों में वायु प्रदूषण फैलाने के लिए अलग-अलग कारक मुख्य रूप से उत्तरदायी होते हैं।


