शिमला/नई दिल्ली: कांग्रेस आलाकमान के सामने विभिन्न राज्यों में जारी पार्टी की अंदरूनी कलह को सुलझाना एक बार फिर बड़ी चुनौती बन गया है। पंजाब के बाद अब पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में भी (Sukhu government in danger) अंदरूनी टकराहट गंभीर रूप ले चुकी है। ताजा सूत्रों के हवाले से खबर है कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की कुर्सी पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
Sukhu government in danger – सूत्रों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की नवनियुक्त प्रभारी रजनी पाटिल ने राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालात पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट पार्टी आलाकमान को सौंप दी है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यद्यपि राज्य में विधानसभा चुनावों में अभी डेढ़ साल का समय शेष है, लेकिन पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी और मौजूदा स्थिति संगठन के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है।
कार्यशैली बदलें या फिर बदल दिया जाए मुख्यमंत्री
पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में आलाकमान को सख्त सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि या तो मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी कार्यशैली में बड़े स्तर पर बदलाव करें, अन्यथा उनके काम-काज की नए सिरे से समीक्षा की जाए और आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री का चेहरा बदल दिया जाए।
मुकेश अग्निहोत्री और विक्रमादित्य सिंह की नजरें
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर कई वरिष्ठ और प्रभावशली चेहरे लगातार अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं।पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह और वर्तमान डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री अरसे से इस पद पर नजर गड़ाए हुए हैं। 2022 में मुख्यमंत्री पद के चयन के दौरान भी ये दोनों नेता रेस में शामिल थे, लेकिन उस समय राहुल गांधी के वीटो के चलते सुक्खू को कमान सौंपी गई थी।


