लखनऊ : उत्तर प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और उमस (before lifting mirror look yourself) के बीच प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जारी बिजली कटौती और ट्रिपिंग का मुद्दा अब बेहद गरमा गया है। लगातार हो रही बिजली कटौती से जहां एक ओर आम जनता बेहाल है, वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे को लेकर मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी सूबे की योगी सरकार पर लगातार हमलावर है।
before lifting mirror look yourself – इस बीच, सत्ता पक्ष की ओर से विपक्ष की तीखी आलोचना का बेहद कड़ा और तार्किक जवाब दिया गया है। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने सूबे की विद्युत व्यवस्था को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा दिए गए बयान पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबा पोस्ट लिखकर तीखा पलटवार किया है। बिजली मंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि दूसरों को नसीहत देने से पहले अपने कार्यकाल के इतिहास को खंगाल लेना चाहिए।
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ऊर्जा मंत्री शर्मा ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने विस्तृत बयान में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में सपा शासनकाल (वर्ष 2012 से 2017) के दौरान पूरे राज्य की औसत पीक बिजली डिमांड महज 13,000 मेगावाट (MW) हुआ करती थी, जिसे तब की सरकार संभाल नहीं पाती थी; जबकि वर्तमान योगी सरकार के कार्यकाल में औद्योगिकीकरण और विकास के चलते यह डिमांड बढ़कर 30,000 मेगावाट से भी अधिक हो चुकी है, जिसे सफलतापूर्वक पूरा किया जा रहा है।
🔌 ‘सपा राज में बिजली चोरी और कटियाबाजी को मिलता था खुला संरक्षण’
आज राज्य में 3.70 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपभोक्ताओं को सीधे ग्रिड से बिजली मिल रही है। इसके साथ ही उन्होंने पिछली अखिलेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उस समय राज्य में बिजली चोरी और अवैध कटियाबाजी को राजनीतिक व प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त था, जिसके कारण पूरी उत्पादन और वितरण व्यवस्था अंदर से खोखली और चरमराई हुई थी।
