नई दिल्ली : देशभर में मुस्लिम समुदाय के लोग ईद-उल-अजहा यानी बकरीद के पवित्र त्योहार की तैयारियों में पूरी शिद्दत के साथ जुटे हुए हैं। त्योहार के मद्देनजर बाजारों में कुर्बानी के लिए बकरों और अन्य वैध पशुओं की जमकर खरीदारी की जा रही है। इसी बीच, कई संवेदनशील जगहों पर गाय की भी कुर्बानी देने की खबरें या (not sacrifice cow on Bakrid) अफवाहें सामने आती हैं, जिसके कारण समाज का आपसी ताने-बाने और सामाजिक सौहार्द बिगड़ जाता है तथा स्थानीय स्तर पर सांप्रदायिक तनाव बढ़ जाता है।

 AIPUB ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से गाय की कुर्बानी से पूरी तरह बचने की पुरजोर अपील की है। संगठन का स्पष्ट कहना है कि देश में मौजूदा कानूनी प्रतिबंधों और सामाजिक तनाव की किसी भी आशंका को देखते हुए दूसरे अन्य वैध जानवरों की कुर्बानी देना धर्म और समाज दोनों के लिए ज्यादा उचित और कल्याणकारी होगा।

इसे भी पढ़ें – द्वारका एक्सप्रेसवे मायापुरी रिंग रोड तक बढ़ेगा; दिल्ली-गुरुग्राम के बीच 55% ट्रैफिक होगा कम

ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड (AIPUB) के प्रमुख मौलाना डॉ. उबैदुल्लाह कासमी ने रविवार (24 मई) को पशुओं की पारंपरिक कुर्बानी देने के मुद्दे पर पूछे गए एक जरूरी सवाल के जवाब में विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म में कुर्बानी (बलिदान) अल्लाह की इबादत का एक बेहद महत्वपूर्ण और अनिवार्य हिस्सा है। उन्होंने धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए बताया कि शरीयत के नियमों में गाय उन चौपायों और जानवरों में निश्चित रूप से शामिल है जिनकी कुर्बानी दी जा सकती है।

not sacrifice cow on Bakrid – उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि जिन परिस्थितियों में कानूनी प्रतिबंध मौजूद हों या अशांति की थोड़ी भी आशंका हो, वहां गाय की बलि देने से पूरी तरह परहेज करना ही हर लिहाज से उचित है। उन्होंने समुदाय के लोगों से पुरजोर शब्दों में अपील की कि वे इस बकरीद पर गाय की कुर्बानी बिल्कुल न करें।

Share.
Exit mobile version