रंगों का त्योहार होली खुशियों, उमंग और आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है. लोग गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, मिठाइयां बांटते हैं और पारंपरिक पकवानों का आनंद लेते हैं. कई जगहों पर होली का जश्न भांग के बिना अधूरा समझा जाता है. ठंडाई, पकौड़े या मिठाइयों के रूप में भांग का सेवन वर्षों से परंपरा (fun of holi should not become punishment) का हिस्सा रहा है. लेकिन उत्साह और मस्ती के इस माहौल में अक्सर लोग इसकी मात्रा पर ध्यान नहीं देते, जो आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है.

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भांग, जो कि कैनाबिस पौधे से तैयार की जाती है, शरीर और दिमाग दोनों पर असर डालती है. कुछ लोगों को लगता है कि भांग शराब से बेहतर है और ज्यादा पीने पर भी शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाएगी. लेकिन ऐसा नहीं है. हाल ही में डॉक्टर आलोक चोपड़ा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट कर बताया है कि भांग का ज्यादा सेवन कैसे हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है. साथ ही किन लोगों को इससे परहेज करना चाहिए.

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fun of holi should not become punishment – डॉ. चोपड़ा के मुताबिक, भांग कैनाबिस से तैयार की जाती है. जिसमें टीएचसी (THC) नामक एक साइकोएक्टिव तत्व होता है. यह तत्व दिमाग और तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है और मानसिक स्थिति में बदलाव ला सकता है. भांग खाने या पीने के रूप में ली जाती है, इसलिए इसका असर धीरे-धीरे शुरू होता है. यही वजह है कि कई लोग तुरंत असर महसूस न होने पर ज्यादा मात्रा में सेवन कर लेते हैं. जिससे गंभीर रिएक्शन और यहां तक कि अस्पताल जाने की नौबत भी आ सकती है.

 

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