कांकेर : जो हाथ कभी जंगलों में बंदूकें थामते थे, वे हाथ अब समाज की मुख्यधारा से जुड़कर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक ‘राखी’ तैयार कर रहे हैं। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर स्थित चौगेल पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित एवं पुनर्वासित नक्सलियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राखी निर्माण का विशेष प्रशिक्षण दिया (left guns and held rakhis) गया है। नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे इन परिवारों के लिए प्रशासन की यह पहल बदलाव की एक नई और सुखद तस्वीर पेश कर रही है।
अब तक तैयार कीं 700 से अधिक आकर्षक राखियां
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत (left guns and held rakhis) सरेंडर्ड नक्सलियों और उनके परिजनों को रंग-बिरंगी व आकर्षक राखियां बनाने का हुनर सिखाया गया है। पुनर्वास केंद्र में उत्साहपूर्वक काम करते हुए इन परिवारों ने अब तक 700 से ज्यादा खूबसूरत राखियां तैयार कर ली हैं। राखी निर्माण का यह कौशल विकास प्रशिक्षण संकुल संगठन केवटी के अंतर्गत मास्टर ट्रेनर कमला तारम और पार्वती आंचले द्वारा प्रदान किया गया।
पूर्व नक्सलियों ने साझा किए अपने भावुक अनुभव
-
-
शीला (पूर्व नक्सली): “पुनर्वास केंद्र में हमें राखी बनाना सिखाया गया है। इस बार हम सब मिलकर रक्षाबंधन मनाएंगे। हमें बहुत अच्छा लग रहा है और यह ट्रेनिंग भविष्य में भी हमारे काम आएगी।”
-
-
-
नरसिंह नेताम व हीरा लाल (पूर्व नक्सली): “हमने पहले कभी राखी नहीं बनाई थी। ट्रेनिंग मिलने के बाद हम सभी मिलकर राखियां बना रहे हैं और बहुत खुश हैं।”
-


