बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षक (कृषि) के पद पर भर्ती के लिए B.Ed. की अनिवार्य योग्यता में एकमुश्त छूट देने की अभ्यर्थियों की मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता, पात्रता मानदंड और सेवा शर्तें निर्धारित करना (B.Ed in teacher recruitment. Mandatory) पूर्णतः राज्य सरकार एवं सक्षम नियम बनाने वाले प्राधिकारी का अधिकार क्षेत्र है। न्यायालय किसी भी भर्ती के लिए तय अनिवार्य योग्यता में अपनी ओर से कोई नई छूट या अपवाद नहीं बना सकता।
मामले की पृष्ठभूमि और अभ्यर्थियों के तर्क
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2019 के पुराने नियम: वर्ष 2019 से लागू पात्रता व्यवस्था के तहत शिक्षक (कृषि) के पद के लिए B.Ed. की बाध्यता नहीं थी।
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डिवीजन बेंच का पिछला निर्देश: ‘अशोकानंद पटेल बनाम छत्तीसगढ़ राज्य’ मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पूर्व में दी गई छूट को असंवैधानिक घोषित करते हुए राज्य सरकार को NCTE Regulations, 2014 के अनुरूप B.Ed. योग्यता अनिवार्य करने का निर्देश दिया था।
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13 फरवरी 2026 की अधिसूचना: राज्य सरकार ने नए नियमों के तहत 13 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी कर कृषि शिक्षक पद के लिए B.Ed. को अनिवार्य कर दिया।
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हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
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योग्यता निर्धारण का अधिकार: पीठ ने टिप्पणी की कि भर्ती की न्यूनतम योग्यताएं तय करना कार्यपालिका का काम है; अदालत अपनी राय को सरकार की पात्रता शर्तों के ऊपर नहीं थोप सकती।
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अनुच्छेद 226 का दायरा: संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक (B.Ed in teacher recruitment. Mandatory) समीक्षा का दायरा केवल निर्णय प्रक्रिया की संवैधानिकता, मनमानी या वैधानिकता की जांच तक सीमित है।
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