देशभर में ठोस कचरे के प्रबंधन को लेकर लागू किए गए नए और कड़े नियमों का असर अब छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी दिखाई देने लगा है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के नए प्रावधानों और शहर में इनके नागरिक स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की कार्ययोजना को लेकर नगर पालिक निगम कार्यालय में एक विशेष पत्रकार-वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान नए नियमों के मुख्य प्रावधानों के साथ-साथ रायपुर में इनके जमीनी स्तर पर पालन और नागरिकों की अहम भूमिका को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई, जिससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाया जा सके।

♻️ घरों और संस्थानों से अब चार श्रेणियों में अलग करना होगा कचरा, घर से ही शुरू होगी नई व्यवस्था

नए नियमों के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि कचरे का स्रोत पर ही चार अलग-अलग श्रेणियों में पृथक्करण (सेग्रीगेशन) किया जाए। रायपुर में भी नागरिकों को अब गीला कचरा, सूखा कचरा, स्वच्छता अपशिष्ट (सैनिटरी वेस्ट) और विशेष देखभाल वाले कचरे को पूरी तरह अलग-अलग रखने की व्यवस्था को प्रभावी बनाना होगा। यदि घरों और व्यावसायिक संस्थानों से निकलने वाले कचरे को शुरुआत में ही अलग कर दिया जाए, तो उसके प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) और वैज्ञानिक निपटान की प्रक्रिया बेहद आसान और प्रभावी हो जाएगी। इस तरह कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी अब केवल नगर निगम तक सीमित न रहकर आम नागरिकों की सीधी भागीदारी पर भी निर्भर होगी।

🏢 थोक कचरा उत्पादकों के लिए सख्त नियम, परिसर में ही गीला कचरा संसाधित करने पर जोर

नए नियमों के अंतर्गत बड़े यानी थोक कचरा उत्पादकों (बुलक वेस्ट जनरेटर) के लिए स्पष्ट और कड़ी जिम्मेदारियां तय की गई हैं। इस श्रेणी में वे संस्थाएं और परिसर आएंगे जिनका क्षेत्रफल 20 हजार वर्ग मीटर या उससे अधिक है, जहां प्रतिदिन 40 हजार लीटर से ज्यादा पानी की खपत होती है, या जो प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा पैदा करते हैं। रायपुर जैसे तेजी से विकसित होते शहर में बड़े आवासीय परिसरों, होटलों, अस्पतालों और व्यावसायिक संस्थानों को अपने परिसर के भीतर ही गीले कचरे का प्रसंस्करण करना होगा। जहां ऐसा करना संभव नहीं होगा, वहां निर्धारित व्यवस्था के तहत ईबीडब्ल्यूजीआर (EBWGR) प्रमाणपत्र की आवश्यकता होगी, ताकि केंद्रीकृत प्रणाली पर अनावश्यक दबाव कम किया जा सके।

💻 ऑनलाइन निगरानी से बढ़ेगी पारदर्शिता, नियम तोड़ने पर लगेगा ‘प्रदूषक भुगतान’ के तहत पर्यावरणीय मुआवजा

नई व्यवस्था के तहत ठोस कचरा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन ट्रैकिंग और डिजिटल निगरानी के दायरे में लाया गया है। कचरे के उत्पादन से लेकर उसके संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और अंतिम निपटान तक की हर गतिविधि को डिजिटल माध्यम से ट्रैक किया जाएगा। इसके अलावा, नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ के आधार पर पर्यावरणीय मुआवजा वसूलने का प्रावधान किया गया है। बिना पंजीकरण संचालन, गलत रिपोर्टिंग या जाली दस्तावेजों के मामलों में भारी जुर्माना लगाया जा सकेगा।

📉 लैंडफिल पर घटेगा दबाव और पुराने कचरा स्थलों का होगा बायो-माइनिंग से उपचार

इस पूरी नई कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य लैंडफिल साइट्स पर जाने वाले कचरे की मात्रा को कम करना है। अब केवल गैर-पुनर्चक्रणीय और अक्रिय कचरा ही लैंडफिल में भेजा जाएगा। इसके साथ ही, शहरों में लंबे समय से जमा पुराने कचरे के ढेरों (डंप साइट्स) का बायो-माइनिंग और बायो-रिमेडिएशन के जरिए वैज्ञानिक उपचार किया जाएगा। रायपुर नगर निगम आयुक्त समित मिश्रा ने जानकारी दी कि शहर में कचरा प्रबंधन को पूरी तरह व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने के लिए प्रशासन पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है, जिसमें नागरिकों का सहयोग सबसे बड़ी ताकत साबित होगा।

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