कोलकाता अपनी भव्य इमारतों और बंगाल के महान व्यक्तित्वों से जुड़ी ऐतिहासिक कहानियों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. इन्हीं ऐतिहासिक नामों में रानी रासमणि का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है, जिन्हें मशहूर दक्षिणेश्वर काली मंदिर के निर्माण के लिएद याद किया जाता है. उनका पारिवारिक घर, ‘जानबाजार राजबाड़ी’ भी अपने आप में एक बेहद दिलचस्प इतिहास समेटे हुए है. यह ऐतिहासिक राजबाड़ी हर साल एक ही जगह पर तीन अलग-अलग दुर्गा पूजाएं आयोजित करती है, जो अपने आप में एक अनूठी परंपरा है.
🏗️ 2. साल 1805 में शुरू हुआ था इस भव्य राजबाड़ी का निर्माण, जानिए इसके पीछे का पूरा इतिहास
इतिहासकारों के अनुसार, मध्य कोलकाता में स्थित इस भव्य घर का निर्माण कार्य साल 1805 में धनी व्यवसायी बाबू प्रीताराम दास ने शुरू करवाया था, जिसे उनके बेटे बाबू राज चंद्र दास ने 1813 में पूरा करवाया था. इस विशाल इमारत में करीब 300 कमरे, छह बड़े आंगन, एक ठाकुर दालान, एक नाट मंदिर, एक शस्त्रागार और एक निजी तालाब भी मौजूद है. बाबू राज चंद्र दास की अचानक मृत्यु के बाद, दूरदर्शी रानी रासमणि ने इस पूरी संपत्ति और कारोबार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर संभाली और इसे सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया.
🌸 3. संपत्ति के बंटवारे से जुड़ी है तीन दुर्गा पूजा की परंपरा, समाज सुधारक के रूप में भी रहा रानी रासमणि का बड़ा योगदान
समय के साथ रानी रासमणि के बाद इस विशाल संपत्ति को उनकी बेटियों के परिवारों के बीच विभाजित कर दिया गया. संपत्ति के इसी बंटवारे के कारण आज भी इस पुरानी राजबाड़ी के अलग-अलग हिस्सों में तीन अलग दुर्गा पूजाएं धूमधाम से मनाई जाती हैं, जो पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है. इसके अलावा, कम उम्र में पति को खोने के बावजूद रानी रासमणि ने समाज सुधार के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए—चाहे वह अंग्रेजों के खिलाफ हुगली नदी पर मछली पकड़ने के टैक्स को हटवाना हो, राजा राममोहन रॉय के साथ सती प्रथा का विरोध करना हो, या फिर शिक्षा और दान-पुण्य के कार्य करना हो.


