नूरपुरबेदी (पंजाब): आधी रात को हुई मूसलाधार बारिश ने नूरपुरबेदी शहर की जल निकासी व्यवस्था के दावों की हवा निकालकर रख दी है।
महज कुछ ही घंटों की भीषण बारिश से पूरा शहर जलमग्न हो गया। इस आपदा की सबसे अधिक मार बंगाला बस्ती के गरीब परिवारों और नूरपुरबेदी स्थित 138 गांवों के किसानों की सेवा के लिए स्थापित ब्लॉक कृषि कार्यालय पर पड़ी। भारी बारिश ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शहर में वर्षा जल निकासी को लेकर किए जा रहे प्रशासनिक दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं।
🌊 बंगाला बस्ती में 3 फुट तक भरा पानी, झुग्गियां छोड़ सड़क किनारे शेड में रात गुजारने को मजबूर हुए लोग
बंगाला बस्ती में जलस्तर देखते ही देखते दो से तीन फुट तक पहुंच गया।
घरों में रखा अनाज, कपड़े, बिस्तर और अन्य कीमती सामान पानी में डूबकर नष्ट हो गए। हालात इतने विकराल हो गए कि महिलाओं, मासूम बच्चों और बुजुर्गों समेत दर्जनों परिवारों को अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर सड़क किनारे दुकानों के शेडों के नीचे पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ी। सुबह लोग भूखे-प्यासे अपने घरों से जमा पानी निकालते नजर आए।
🛑 भारी तबाही से मजदूर मजदूरी से वंचित, स्थानीय निवासियों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
इस अव्यवस्था और जलभराव के कारण बंगाला बस्ती के बच्चे स्कूल नहीं जा सके और दिहाड़ी मजदूर अपनी रोजी-रोटी से वंचित रह गए।
बस्तीवासियों ने आरोप लगाया कि हर साल बरसात के दौरान यही खौफनाक हालात बनते हैं, लेकिन न तो नालों की सफाई होती है और न ही पानी निकासी का कोई स्थायी प्रबंध किया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस बार भी प्रशासनिक स्तर पर कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर संघर्ष का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
🏛️ ब्लॉक कृषि कार्यालय बना तालाब, 80 क्विंटल गेहूं का बीज, मशीनें और रिकॉर्ड हुए बर्बाद
सुबह जब ब्लॉक कृषि कार्यालय नूरपुरबेदी का स्टाफ ड्यूटी पर पहुंचा, तो पूरा परिसर जलमग्न था।
कर्मचारियों ने स्थानीय लोगों की मदद से सरकारी रिकॉर्ड को बचाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए, लेकिन काफी महत्वपूर्ण दस्तावेज पानी में भीगकर खराब हो गए। कार्यालय में बनने वाले नए प्लांट क्लिनिक के लिए आई महंगी मशीनें, फर्नीचर और लगभग 80 क्विंटल गेहूं का बीज भी पानी में डूबकर बर्बाद हो गया। कृषि उप निरीक्षक शमशेर सिंह ने बताया कि कुल नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है।
🏗️ 25 लाख रुपये की मंजूरी के बावजूद नहीं बनी नई इमारत, टपकती छतों के नीचे चल रहा था दफ्तर
विभागीय कर्मचारियों ने बताया कि कृषि कार्यालय की इस पुरानी इमारत को काफी समय पहले ही असुरक्षित घोषित किया जा चुका है।
नई इमारत के निर्माण के लिए 25 लाख रुपये की राशि भी स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ। स्थिति यह है कि कार्यालय के तीन कमरों की छतों से पानी टपक रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते नई इमारत का निर्माण हो जाता, तो इतने बड़े सरकारी नुकसान को टालना संभव था।
🏘️ सोनी मॉडल स्कूल मोहल्ले और वाटर सप्लाई कार्यालय में भी घुसा पानी, उपभोक्ता परेशान
शहर के सोनी मॉडल स्कूल मोहल्ले में भी पहाड़ी क्षेत्रों से बहकर आया पानी दो से ढाई फुट तक भर गया, जिससे कई परिवारों के घरों में पानी घुसने से आर्थिक नुकसान हुआ।
वहीं, नूरपुरबेदी के वाटर सप्लाई कार्यालय परिसर में भी भारी जलभराव हो गया। अपने जरूरी कार्यों के लिए आए उपभोक्ताओं को कार्यालय में पानी भरा होने के कारण निराश होकर खाली हाथ वापस लौटना पड़ा, जबकि अधिकारी नुकसान का जायजा लेते रहे।
📢 “कुंभकर्णी नींद सोया प्रशासन, प्रभावितों को मिले मुआवजा”: जिला कांग्रेस अध्यक्ष अश्वनी शर्मा
जिला कांग्रेस कमेटी रूपनगर के अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने इस स्थिति पर दुख जताते हुए कहा कि नूरपुरबेदी में हर वर्ष बरसात में लोग त्रासदी झेलते हैं, पर सरकार केवल कागजी दावों तक सीमित रहती है।
उन्होंने मांग की कि बंगाला बस्ती के प्रभावित परिवारों को तुरंत मुआवजा, मुफ्त राशन और राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, ब्लॉक कृषि कार्यालय की नई इमारत का निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जाए और स्थायी ड्रेनेज प्लान लागू हो, अन्यथा कांग्रेस पार्टी जनहित में सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी।


