नई दिल्ली: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (Gold Monetisation Scheme – GMS) को अधिक व्यावहारिक और जन-सुलभ बनाने हेतु इसमें व्यापक परिवर्तन किया जा सकता है।
यदि नया प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है, तो ज्वैलर्स को आम ग्राहकों से प्राप्त किया गया पुराना सोना अधिकृत रिफाइनरी तक पहुँचाने के एवज में लगभग 1% का अतिरिक्त इंसेंटिव प्राप्त होगा। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) ने इस संदर्भ में सरकार को एक नया रूपरेखा प्रस्ताव प्रेषित किया है। इस नए मॉडल के तहत, ज्वैलर्स ग्राहकों से पुराना सोना संग्रहित कर रिफाइनर्स को सौंपेंगे और बदले में उन्हें इस सेवा हेतु कमीशन/इंसेंटिव प्रदान किया जाएगा।
Gold Monetisation Scheme – इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अध्यक्ष पृथ्वीराज कोठारी ने जानकारी देते हुए बताया कि यदि यह संशोधित योजना धरातल पर लागू होती है, तो ज्वैलर्स प्रत्येक लेन-देन पर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे।
इससे ज्वैलर्स स्वयं आगे बढ़कर इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे और ग्राहकों को इसमें सम्मिलित होने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। कोठारी के अनुसार, आम भारतीय नागरिक अपना पुराना सोना बेचने या बदलने के लिए बैंकों की तुलना में ज्वैलर्स के पास जाना अधिक सुविधाजनक और सहज समझता है। प्रस्ताव में 0.75% से 1% तक इंसेंटिव देने की अनुशंसा की गई है, जिस पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लिया जाएगा।


