प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): शहर से अचानक रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए 27 वर्षीय युवा फोटोग्राफर आलोक गुप्ता के मामले में पुलिस ने एक रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा किया है।

परिजनों द्वारा गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने जब गहन छानबीन शुरू की, तो पता चला कि आलोक गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने वाला कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि उसका अपना ही करीबी दोस्त निकला। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी कैमरों की मदद से इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाते हुए वारदात में शामिल तीनों मुख्य आरोपियों को धर दबोचा है।

📹 नीले बैग में शव ले जाते सीसीटीवी में दिखे आरोपी: मध्य प्रदेश के रीवा में मिला शव

जांच का सुराग और कड़ियों का मिलान:

  • सीसीटीवी फुटेज से खुलासा: जांच के दौरान पुलिस ने इलाके के दर्जनों सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें तीन संदिग्ध युवक एक बड़ा और भारी नीला बैग उठाकर ले जाते हुए साफ दिखाई दिए।

  • रीवा में लावारिस शव: इसी बीच प्रयागराज पुलिस को मध्य प्रदेश के रीवा जिले से सूचना मिली कि वहां एक अज्ञात युवक का शव बरामद हुआ है।

  • कड़ियों का जुड़ाव: प्रयागराज पुलिस ने रीवा पुलिस से संपर्क साधा और परिजनों से शिनाख्त कराई, जिसके बाद स्पष्ट हो गया कि वह शव लापता फोटोग्राफर आलोक गुप्ता का ही था।

🔫 गोली मारकर की गई हत्या: कार में नीले बैग में रखकर रीवा में ठिकाने लगाया शव

हत्याकांड और साक्ष्य छिपाने की साजिश:

  • गोली मारकर उतारा मौत के घाट: पुलिस पूछताछ के अनुसार, मुख्य साजिशकर्ता ने अपने दो साथियों शुभम यादव और अंकुश यादव के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से आलोक को गोली मार दी।

  • सैकड़ों किलोमीटर दूर शव फेंका: हत्या के उपरांत साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से तीनों ने आलोक के शव को बड़े नीले बैग में भरा, उसे कार की डिग्गी में रखा और प्रयागराज से सैकड़ों किलोमीटर दूर रीवा के बीहड़ इलाके में फेंक आए।

  • शादी-समारोहों में करता था फोटोग्राफी: मृतक आलोक गुप्ता एक पेशेवर और होनहार फोटोग्राफर था, जो शादियों और अन्य आयोजनों में शूटिंग कर अपना जीवनयापन करता था।

📱 मर्डर के बाद 20 दिनों तक फोन से करते रहे बात: प्रेमिका को भनक न लगे इसलिए रचा नाटक

गुमराह करने की साजिश और तकनीकी ट्रैकिंग:

  • कॉल के दौरान हत्या: वारदात के समय आलोक अपनी प्रेमिका से फोन पर बात कर रहा था। शव ठिकाने लगाते समय हत्यारों के हाथ आलोक का मोबाइल फोन लग गया।

  • जीवित होने का ढोंग: हत्या का राज न खुले, इसलिए आरोपियों ने आलोक के फोन का इस्तेमाल जारी रखा। वे 20 दिनों तक उसकी प्रेमिका और परिचितों से मैसेज और कॉल पर सामान्य रूप से बातचीत करने का नाटक करते रहे।

  • मोबाइल लोकेशन से खुला राज: परिवार की सतर्कता और दर्ज गुमशुदगी के कारण पुलिस लगातार मोबाइल की तकनीकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी, जिसने पुलिस को सीधे आरोपियों तक पहुंचा दिया।

⚖️ सूबेदारगंज पुल के नीचे से दबोचे गए हत्यारे: अवैध पिस्तौल बरामद, जलन बनी हत्या की वजह

गिरफ्तारी और रंजिश का खुलासा:

  • घेराबंदी कर गिरफ्तारी: पुलिस टीम ने पुख्ता सूचना के आधार पर जाल बिछाकर सूबेदारगंज स्थित पुल के नीचे से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

  • हथियार बरामद: आरोपियों के कब्जे से कत्ल में प्रयुक्त एक अवैध पिस्तौल और जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।

  • अच्छी आमदनी से जलन: पुलिसिया पूछताछ में सामने आया कि आलोक फोटोग्राफी के पेशे से अच्छी कमाई कर रहा था, जिससे उसके दोस्त के मन में गहरी ईर्ष्या और जलन पैदा हो गई थी। इसी दुर्भावना और रंजिश के चलते उसने साथियों के साथ मिलकर अपने ही दोस्त को रास्ते से हटा दिया।

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