श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को विधानसभा में राज्य का दर्जा (Statehood) बहाल किए जाने को लेकर आधिकारिक प्रस्ताव पेश किया, जिसके सदन में आते ही जबरदस्त राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया। इस तीखे विरोध और हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही को 30 मिनट के (Jammu and Kashmir Assembly News) लिए स्थगित करना पड़ा।
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी विधायक ही जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के मार्ग में सबसे बड़ा रोड़ा बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि यदि वास्तव में बीजेपी जम्मू-कश्मीर की जनता की हितैषी होती, तो वह इस प्रस्ताव को लेकर पुराने विधानसभा प्रस्तावों का बहाना नहीं बनाती।
उमर अब्दुल्ला ने 29 विधायकों को बताया रुकावट
सीएम ने स्पष्ट किया कि यह नया प्रस्ताव पहले पास हुए प्रस्तावों में किसी प्रकार का बदलाव नहीं करता है, और हम चाहते हैं कि इस बार बीजेपी सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए सकारात्मक रूप से मतदान करे। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में जिन कठिनाइयों का सामना किया है, उन्हें दूर करने के लिए केंद्र सरकार तक स्पष्ट संदेश पहुंचना जरूरी है।
बीजेपी ने प्रस्ताव को बताया विवादित और अस्वीकार्य
बीजेपी विधायक और नेता प्रतिपक्ष (LoP) सुनील शर्मा ने मुख्यमंत्री द्वारा पेश इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे बेहद विवादित और बहस वाला करार दिया। सुनील शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री जिस 26 जून 2000 के प्रस्ताव का परोक्ष रूप से जिक्र कर रहे हैं, उसे तत्कालीन केंद्र सरकार (अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल) द्वारा (Jammu and Kashmir Assembly News) पहले ही खारिज किया जा चुका है।


