हिंदू धर्म में पापांकुशा एकादशी को जगत के पालनहार भगवान विष्णु की असीम कृपा पाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पवित्र व्रत प्रत्येक वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा-अर्चना करने, व्रत रखने और दान-पुण्य करने से व्यक्ति को अपने पूर्वकृत गलत कर्मों से मुक्ति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा प्राप्त होती है। ‘पापांकुशा’ शब्द का सीधा संबंध मनुष्य के जीवन में पापों पर अंकुश लगाने की धारणा से जोड़ा गया है। इसी वजह से इस एकादशी को प्रायश्चित, भक्ति और सच्चे सद्कर्मों की ओर बढ़ने का सबसे उत्तम अवसर माना जाता है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि की शुरुआत 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे होगी और इसका समापन 22 अक्टूबर को दोपहर 2:47 बजे होगा। सनातन परंपरा में उदया तिथि का विशेष महत्व होने के कारण 22 अक्टूबर को ही व्रत रखा जाएगा।
🌸 पापांकुशा एकादशी का नाम क्यों पड़ा और क्या है इसका महत्व?
पापांकुशा एकादशी के नाम के पीछे एक गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक अर्थ छिपा हुआ है। यहाँ ‘अंकुश’ शब्द का अर्थ किसी भी चीज को नियंत्रित करने या काबू में रखने का साधन होता है। इसी आधार पर पापांकुशा को ‘पापों पर अंकुश लगाने वाली एकादशी’ के रूप में समझाया गया है। धार्मिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने, व्रत का पालन करने, जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र का दान देने तथा अच्छे कर्म करने से मनुष्य को जाने-अनजाने में किए गए सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
इस पावन दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा करने की विशेष परंपरा है। भक्त इस दिन श्रद्धा के साथ उपवास रखते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं, ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करते हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार फल, अनाज, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करके श्रीहरि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
📜 पापांकुशा एकादशी की पौराणिक कथा और पूजा की विधि
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पापांकुशा एकादशी के महात्म्य का वर्णन भगवान श्रीकृष्ण और राजा युधिष्ठिर के बीच हुए संवाद में मिलता है। पद्म पुराण में उल्लेखित कथा के अनुसार, जब युधिष्ठिर जी ने आश्विन शुक्ल एकादशी के बारे में विस्तार से जानने की इच्छा जताई, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें इस व्रत की महिमा बताई थी। श्रीकृष्ण ने कहा था कि इस दिन श्रद्धापूर्वक विष्णु जी की पूजा करने वाले को मोक्ष और पुण्य की प्राप्ति होती है।
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पूजा की विधि: पापांकुशा एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें। श्रीहरि के पद्मनाभ स्वरूप का ध्यान करते हुए उन्हें पीले पुष्प, फल, धूप, दीप और तुलसी दल अर्पित करें।
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इस दिन भगवान विष्णु के मूल मंत्रों का जाप करना, विष्णु सहस्रनाम का पाठ सुनना और एकादशी व्रत की कथा पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है।


