उत्तरप्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद में इटवा तहसील के खुनियाव विकास खण्ड में केले की खेती अधिक की जाती है l केले के उत्पादन के बाद तना बेकार हो जाता है, जिसका कोई मूल्य नहीं मिलता था l ग्राम वासियों से विचार विमर्श करके मुख्य विकास अधिकारी महोदय द्वारा इस ओर विशेष प्रयास कर केले के रेशे से बनने वाली वस्तुओं के निर्माण हेतु ग्राम वासियों को प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया l नाबार्ड (Nabard) द्वारा संचालित सूक्ष्म उद्यमिता विकास योजना के अन्तर्गत केले के रेशे से विभिन्न सामग्री बनने के लिए समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है l
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Nabard – वैसे तो आत्म निर्भर भारत के तहत देश में अनेक प्रकार की योजनाए चलाई जा रही है परन्तु अब छोटे छोटे गांव में इस तरह के उपक्रम चलाकर सरकार के द्वारा हर व्यक्ति को आत्म निर्भर बनाने की दिशा में यह एक उम्दा कदम हैl
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मुख्य विकास अधिकारी महोदय द्वारा उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया गया l वर्तमान में समूह की महिलाओं द्वारा केले के रेशे से टोपी, चप्पल, फुट मैट, बैग, टोकरी आदि विभिन्न सामग्री बनाई गई है l ग्राम संगठन के अंतर्गत आजाद आजीविका समूह की अध्यक्ष श्रीमती सरोज देवी द्वारा बताया गया कि उनकी सामग्री को लोग पसन्द कर रहे है और उनकी डिमांड है l मुख्य विकास अधिकारी महोदय द्वारा अजीविका मिशन एवम नाबार्ड के सहयोग से केले के रेशे से बनने वाली वस्तुओं की विक्री हेतु ग्रामीण हाट के बनने के लिए तथा केले के रेशे बनने की लिए समूह की महिलाओं हेतु मशीन लगाने के लिए निर्देशित किया गया l प्रशिक्षण कार्यक्रम ने श्री बृज राज साहनी, डीडीएम नाबार्ड एवम उनके मास्टर ट्रेनर सहित समूह की महिलाए, ग्राम वासियों उपस्थित रहेl

