नई दिल्ली: चालू वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान भारतीय मोबाइल बाजार में चीनी स्मार्टफोन ब्रांड्स की हिस्सेदारी में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो घटकर अब 67 से 68 प्रतिशत के बीच रह गई है। यह पिछले आठ वर्षों से भी अधिक समय में सबसे निचला स्तर है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, मेमोरी चिप की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल आने के कारण इन कंपनियों को अपने बजट और कम कीमत वाले स्मार्टफोन के मॉडल्स में कटौती करनी पड़ी है, जबकि यही वह सेगमेंट था जिससे उन्हें सबसे अधिक बिक्री और मुनाफा मिलता था।
मेमोरी चिप की महंगी कीमतों ने बिगाड़े उद्योग के समीकरण
प्रमुख मार्केट रिपोर्ट्स और उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछली तिमाही में चीनी ब्रांडों की हिस्सेदारी घटकर करीब 68 फीसदी पर आ गई, जबकि उससे पिछले क्वार्टर में यह 71 प्रतिशत और एक साल पहले 75 प्रतिशत के आसपास थी। जानकारों का कहना है कि वीवो, ओप्पो और शाओमी जैसी बड़ी कंपनियां लगातार अपने एंट्री-लेवल मॉडल्स को कम कर रही हैं। मेमोरी की बढ़ती लागत का सबसे बुरा असर इसी किफायती सेगमेंट पर पड़ा है, जिससे लावा और एआई+ (Ai+) जैसे घरेलू भारतीय ब्रांड्स को त्योहारों के सीजन से पहले कम बजट वाले ग्राहकों की मांग पूरा करने का एक सुनहरा अवसर मिल गया है।
फीचर्स कम कर लागत को नियंत्रित करने की कोशिश में कंपनियां
विभिन्न विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ तिमाहियों से चीनी स्मार्टफोन निर्माता अपनी लागत को संतुलित करने के लिए फोन के फीचर्स और स्पेसिफिकेशन में लगातार कटौती कर रहे हैं। कम कीमत वाले सेगमेंट से मॉडल्स की संख्या घटाकर वे अब अपने मुनाफे को सुरक्षित रखने के लिए मिड-रेंज और प्रीमियम सेगमेंट की बिक्री पर अधिक जोर दे रहे हैं। चिप्स की रिकॉर्ड कीमतों ने पूरे उद्योग के व्यापारिक समीकरण को बदल दिया है, जिससे कम मार्जिन पर काम करने वाली इन कंपनियों को अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि प्रीमियम उत्पादों के दम पर अन्य बड़ी कंपनियों को अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिल रही है।
भारतीय ब्रांड्स की हिस्सेदारी में आया जबरदस्त उछाल
सस्ते और एंट्री-लेवल फोन के बाजार में अभी भी भारी मांग बनी हुई है, लेकिन डिवाइस महंगे होने के कारण आम उपभोक्ता अपना बजट बढ़ाने से कतरा रहे हैं। ऐसे में घरेलू भारतीय ब्रांड इस स्थिति का पूरा फायदा उठा रहे हैं और वॉल्यूम बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही में भारतीय ब्रांड्स की कुल हिस्सेदारी बढ़कर 7 प्रतिशत हो गई है, जो एक साल पहले मात्र 2 प्रतिशत थी। इस बढ़ोतरी में लावा और एआई+ जैसे ब्रांड्स का योगदान सबसे बड़ा रहा है, साथ ही नए घरेलू ब्रांड्स ने भी बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
स्मार्टफोन शिपमेंट में आई गिरावट और भविष्य की राह
मोबाइल बाजार में अनिश्चितता का दौर अभी भी जारी है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत के कुल स्मार्टफोन शिपमेंट में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 20 से 26 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है और यह घटकर 35.8 मिलियन यूनिट रह गया है, जो पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर है। मेमोरी कॉस्ट बढ़ने से फोन की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे ग्राहकों ने नई खरीदारी फिलहाल टाल दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू ब्रांड्स को अपनी इस बढ़त को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए अनुसंधान (R&D), बेहतर क्वालिटी और मजबूत आफ्टर-सेल्स सर्विस में बड़े पैमाने पर निवेश करना होगा।


