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    Home » बर्नस्टीन ने घटाया Nifty 50 का टारगेट, दिसंबर 2026 के लिए 26,000 से घटाकर किया 25,000

    बर्नस्टीन ने घटाया Nifty 50 का टारगेट, दिसंबर 2026 के लिए 26,000 से घटाकर किया 25,000

    October 22, 2026 व्यापार 2 Mins Read
    Bernstein Report
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    भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन की एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा है. फर्म ने दिसंबर 2026 तक के लिए Nifty 50 का टारगेट 26,000 अंकों से घटाकर 25,000 अंक कर दिया है. इसका मतलब साफ है कि बाजार में तेजी की गुंजाइश अभी भी बाकी है, लेकिन पहले के मुकाबले काफी कम है. बर्नस्टीन का कहना है कि भारतीय शेयरों की वैल्यूएशन पहले की तुलना में कुछ हद तक आकर्षक (Bernstein Report) जरूर हुई है, मगर वे अब भी इतने सस्ते नहीं हैं कि निवेशक बिना सोचे-समझे अंधाधुंध खरीदारी शुरू कर दें.  

     शेयर बाजार सस्ता हुआ, फिर भी महंगा क्यों? जानिए P/E रेशियो का पूरा गणित

    इसे एक आसान उदाहरण से समझ सकते हैं. मान लीजिए किसी कंपनी का शेयर पहले 1,000 रुपए का था और उसकी सालाना कमाई 50 रुपए प्रति शेयर थी, ऐसे में निवेशक उस शेयर के लिए कंपनी की कमाई के मुकाबले 20 गुना कीमत चुका रहे थे. अब यदि शेयर गिरकर 900 रुपए पर आ जाता है, लेकिन कमाई 50 रुपए ही बनी रहती है, तो वैल्यूएशन घटकर 18 गुना हो जाएगी. शेयर कीमत के लिहाज से पहले से सस्ता हुआ, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह अन्य विकल्पों के मुकाबले बहुत ज्यादा सस्ता हो. शेयर बाजार में इसे ‘P/E रेशियो’ (प्राइस-टू-अर्निंग रेशियो) से समझा जाता है:

      • P/E ज्यादा: निवेशक कंपनी की मौजूदा कमाई के मुकाबले बहुत ज्यादा कीमत दे रहे हैं.

      • P/E कम: शेयर तुलनात्मक रूप से सस्ता हो सकता है, लेकिन कंपनी की ग्रोथ और जोखिम को देखना भी उतना ही जरूरी है.

      • घटने के बावजूद बाजार महंगा: यदि वैश्विक स्तर पर अन्य देशों के बाजार कम वैल्यूएशन पर उपलब्ध हों या घरेलू कंपनियों की कमाई कमजोर हो, तो भारतीय शेयर अब भी महंगे लग सकते हैं. बर्नस्टीन ने अपने नए निफ्टी टारगेट के लिए वित्त वर्ष 2028 (FY28) की अनुमानित कमाई पर 18 गुना वैल्यूएशन माना है. 

     

     

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