करनाल में पंचायती राज विभाग द्वारा बनाई जा रही एक निर्माणाधीन बिल्डिंग में गंभीर अनियमितताएं और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। गुणवत्ता संबंधी खामियां मिलने के बाद विभाग ने एक्सईएन परमिंद्र और नारायण दत्त को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस बिल्डिंग के निर्माण का ठेका ‘संजय कंस्ट्रक्शन’ कंपनी को दिया गया था, जिसकी कार्यप्रणाली अब जांच के घेरे में है।

🔍 गुणवत्ता की जांच में खुली पोल

पंचायती राज विभाग की क्वालिटी कंट्रोल विंग द्वारा की गई जांच में भवन निर्माण की पोल खुल गई। जांच टीम को पिलरों और लेंटर से सीमेंट उखड़ा हुआ मिला, जिससे अंदर लगा लोहे का सरिया साफ दिखाई दे रहा है। निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता बेहद निम्न पाई गई, जिसके बाद निर्माण एजेंसी कंपनी के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं।

⚖️ सीएम के संज्ञान के बाद सख्त कार्रवाई

इस पूरे मामले की रिपोर्ट मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तक पहुँचने के बाद हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग के चीफ इंजीनियर ने करनाल का दौरा किया और लापरवाह अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। चीफ इंजीनियर ने एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की है। यह कमेटी न केवल निर्माण एजेंसी, बल्कि संबंधित जेई (JE), एसडीओ (SDO) और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगी।

🛑 आगे क्या होगा?

पूरे प्रोजेक्ट की अब दोबारा गुणवत्ता जांच होगी ताकि भवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने पर विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संपादकीय टिप्पणी: सार्वजनिक धन से बन रही इमारतों में गुणवत्ता से समझौता करना न केवल भ्रष्टाचार है, बल्कि यह भविष्य में किसी बड़े हादसे को भी न्योता दे सकता है। क्या आपको लगता है कि ऐसी निर्माण कंपनियों को ‘ब्लैक लिस्ट’ कर उन पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।

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