झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाला चुनाव राजनीतिक गलियारों में बेहद दिलचस्प होता जा रहा है। 1 जून से नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। एक ओर जहां सत्ताधारी महागठबंधन (जेएमएम, कांग्रेस, आरजेडी, भाकपा माले) अभी तक उम्मीदवारों के नाम और सीट बंटवारे को लेकर आम सहमति नहीं बना पाया है, वहीं एनडीए ने भी चुनावी मैदान में उतरने की पूरी तैयारी कर ली है।
⚔️ एनडीए की रणनीति और जीत का आत्मविश्वास
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने स्पष्ट किया है कि एनडीए का उम्मीदवार कौन होगा, इसका निर्णय पार्टी नेतृत्व ने कर लिया है और जल्द ही नाम की घोषणा कर दी जाएगी। वहीं, मांडू से आजसू विधायक निर्मल महतो ने चुटीले अंदाज में जीत का दावा किया है। उन्होंने कहा कि “उम्मीदवार भी है और चुनाव भी जीतेंगे।” हालांकि, एनडीए के पास वर्तमान में 24 विधायक हैं, जबकि एक सीट जीतने के लिए 28 मतों की आवश्यकता है। इन आंकड़ों के बावजूद भाजपा का चुनावी मुकाबले से पीछे न हटना राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं पैदा कर रहा है।
📉 गठबंधन में अंतर्कलह?
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने महागठबंधन में उम्मीदवारों को लेकर जारी खींचतान पर तंज कसते हुए कहा कि यह आपसी कलह यह दर्शाता है कि सत्ताधारी खेमे में ‘सब कुछ ठीक नहीं है’। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ताधारी दल के भीतर बढ़ता मतभेद चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
👤 संभावित उम्मीदवार कौन?
राज्यसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच संभावित उम्मीदवारों के नामों की चर्चा भी तेज है। राजनीतिक हलकों में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और धनबाद के उद्योगपति नंदलाल अग्रवाल का नाम प्रमुखता से चर्चा में है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही यह साफ हो जाएगा कि ऊंट किस करवट बैठता है और क्या एनडीए अपने सीमित आंकड़ों के बावजूद चौंकाने वाले परिणाम दे पाएगा।
संपादकीय टिप्पणी: राज्यसभा चुनाव में जोड़-तोड़ की राजनीति अक्सर चर्चा में रहती है। क्या आपको लगता है कि गठबंधन के भीतर का असंतोष किसी भी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत हो सकता है? अपने विचार नीचे साझा करें।


