जबलपुर। शहपुरा तहसील के भीकमपुर क्षेत्र से जमीन फर्जीवाड़े का एक अनोखा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है।यहां एक गरीब किसान का दावा है कि उसे खबर तक नहीं लगी और उसकी 7 एकड़ पुश्तैनी जमीन किसी और के नाम ट्रांसफर कर दी गई। इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब किसान यूरिया खाद लेने के लिए सरकारी केंद्र पर पहुंचा और ऑनलाइन सिस्टम में उसका नाम ही गायब मिला। पीड़ित किसान गिदा बर्मन अब अपनी जमीन वापस पाने के लिए नेताओं से लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जबलपुर जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित भीकमपुर गांव के रहने वाले गिदा बर्मन सदियों से अपनी इस पुश्तैनी जमीन पर खेती कर अपने परिवार का गुजर-बसर कर रहे हैं।

📲 ई-पर्ची बनवाते समय खुला फर्जीवाड़े का राज: खसरा नंबर 30/1 और 347 पर दिखा दूसरा मालिक

पीड़ित किसान ने अपने खेत में खरीफ फसल की बुआई की थी और फसल के लिए यूरिया की सख्त जरूरत थी।

यूरिया प्राप्त करने के लिए किसान ने जैसे ही अपना खसरा और पहचान पत्र ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कराया, तो उसके होश उड़ गए। खसरा नंबर 30/1 (रकबा 1.520 हेक्टेयर) और खसरा नंबर 347 (रकबा 1.330 हेक्टेयर) की जमीन पर किसी अन्य व्यक्ति का नाम बतौर मालिक दर्ज हो चुका था। जमीन का मालिकाना हक दूसरे के नाम पर देखते ही खाद वितरण केंद्र के कर्मचारी ने ई-पर्ची बनाने से साफ मना कर दिया और किसान को बताया कि यह जमीन अब उसकी नहीं रही।

🛑 “मैंने कभी जमीन का सौदा नहीं किया”: पटवारी और पुलिस पर मदद न करने का आरोप

पीड़ित किसान का कहना है कि उसने न तो किसी को अपनी जमीन बेची है और न ही कभी जमीन बेचने का कोई सौदा किया।

उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं है कि उसकी जमीन का नामांतरण (Transfer) किसी और के नाम पर कैसे हो गया। किसान का आरोप है कि स्थानीय पुलिस और पटवारी उसकी कोई मदद नहीं कर रहे हैं। जब कहीं से कोई सुनवाई नहीं हुई, तो पीड़ित किसान बरगी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता संजय यादव की शरण में पहुंचा।

📢 पूर्व विधायक संजय यादव का हमला: “अंधेर नगरी चौपट राजा का जीता-जागता उदाहरण”

इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व विधायक संजय यादव ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा, “यह मामला ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ का जीता-जागता प्रमाण है। आम नागरिक यदि जायज तरीके से जमीन की रजिस्ट्री कराता है, तो राजस्व रिकॉर्ड में नाम सुधरवाने के लिए उसे महीनों तहसील के चक्कर काटने पड़ते हैं। वहीं दूसरी तरफ, महज 7 दिनों के भीतर एक गरीब की जमीन की फर्जी रजिस्ट्री भी हो गई और फर्जी तरीके से रिकॉर्ड भी दुरुस्त कर दिया गया। यदि पीड़ित किसान की जमीन तुरंत वापस नहीं की गई और जालसाजी करने वालों पर 420 का केस दर्ज नहीं हुआ, तो हम सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।”

🔍 SDM मदन रघुवंशी का आश्वासन: “रिकॉर्ड में गलती हुई होगी तो प्रशासन सुधार करेगा”

इस पूरे मामले पर शहपुरा के एसडीएम (SDM) मदन रघुवंशी का बयान भी सामने आया है।

उन्होंने कहा, “यह मामला हमारे संज्ञान में आया है। फरियादी किसान से नियमानुसार अपील दाखिल करने को कहा गया है। जैसे ही औपचारिक अपील प्राप्त होगी, रजिस्ट्री और राजस्व रिकॉर्ड की सूक्ष्मता से जांच की जाएगी। आजकल डिजिटल प्रणाली से नाम ट्रांसफर की प्रक्रिया तेजी से होती है। यदि रिकॉर्ड में कोई तकनीकी या लिपिकीय त्रुटि हुई है, तो प्रशासन अपनी गलती सुधारकर पीड़ित का रिकॉर्ड पुनः दुरुस्त करेगा।”

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