आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज विस्तार और वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने भारत के आईटी सेक्टर को गहरी चुनौती के दौर में ला खड़ा किया है. देश की दिग्गज कंपनियां जैसे Infosys और HCL Technologies के कमजोर नतीजों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. पिछले कुछ महीनों में इस सेक्टर की मार्केट वैल्यू में करीब 115 अरब डॉलर (thousands of jobs in crisis) की गिरावट दर्ज की गई है. बढ़ती अनिश्चितता, घटता क्लाइंट खर्च और AI से बदलते बिजनेस मॉडल के बीच निवेशक सतर्क हो गए हैं, जिससे आईटी शेयरों पर दबाव लगातार बना हुआ है.
भारतीय आईटी सेक्टर इस समय दोहरे दबाव में है एक तरफ वैश्विक मंदी का असर और दूसरी तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेज उभार इस सेक्टर को काफी नुकसान पहुंचा रहा है. हाल ही में Infosys ने उम्मीद से कम ग्रोथ का अनुमान दिया, जबकि HCL टेक्नोलॉजीस के कमजोर मुनाफे ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी. इन नतीजों के बाद आईटी शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली और कई ब्रोकरेज हाउस ने रेटिंग भी घटा दी.
निफ्टी आईटी में आई गिरावट
आईटी सेक्टर का प्रमुख इंडेक्स निफ्टी आईटी इंडेक्स जून 2023 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. पिछले चार महीनों में इस सेक्टर का कुल मार्केट कैप करीब 115 अरब डॉलर घट चुका है. इसका असर व्यापक बाजार पर भी पड़ा है, क्योंकि Nifty 50 में आईटी कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग 10% है.
thousands of jobs in crisis – ग्लोबल स्तर पर अनिश्चितता खासतौर पर ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव ने कंपनियों के टेक खर्च को सीमित कर दिया है. क्लाइंट अब बड़े और लंबे प्रोजेक्ट्स को टाल रहे हैं और केवल जरूरी खर्च पर ध्यान दे रहे हैं. इसके साथ ही AI तेजी से पारंपरिक आईटी सर्विस मॉडल को बदल रहा है, जिससे कंपनियों को अपनी रणनीति दोबारा तय करनी पड़ रही है.

