नई दिल्ली: भारत में उर्वरक के बढ़ते आयात और पश्चिम एशिया संकट के कारण सरकारी खजाने पर पड़ रहे दबाव को लेकर संसद में अहम चर्चा हुई। सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026-27 के लिए खाद सब्सिडी की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए उसके पास पर्याप्त कोष (फंड) मौजूद है। सरकार ने बताया कि 13 जुलाई तक 70,709 करोड़ रुपये खर्च (India Fertilizer Export) किए जा चुके हैं, जो इस साल के कुल 1.77 लाख करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन का 39.9 प्रतिशत है।
3 साल में 52 प्रतिशत बढ़ा भारत का उर्वरक निर्यात
अन्य स्रोतों से प्राप्त ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच तीन वर्षों में भारत के उर्वरक (Fertilizer) निर्यात में लगभग 52 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, भारत द्वारा सालाना आयात किए जाने वाले उर्वरक की तुलना में निर्यात की मात्रा बहुत कम है, लेकिन उर्वरकों पर चल रही मौजूदा वैश्विक चर्चाओं को देखते हुए यह एक उल्लेखनीय स्थिति है। भारत ने वित्त वर्ष 2023-24 में लगभग 3.1 लाख टन उर्वरक का निर्यात किया था, जो 2025-26 में बढ़कर 4.7 लाख टन हो गया है।
आयात में भी हुआ 36 फीसदी से ज्यादा का इजाफा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इसी अवधि के दौरान उर्वरक आयात भी तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2023-24 में आयात 207 लाख टन था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में 36.09 प्रतिशत बढ़कर 280 लाख टन के पार पहुंच गया। बता दें कि भारत दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक आयातकों में से एक है, जो हर साल वैश्विक बाजारों से मुख्य रूप से यूरिया, डाई अमोनियम फॉस्फेट (DAP), म्यूरेट ऑफ पोटाश और NPK खरीदता है। भारत में यूरिया और डीएपी की सबसे अधिक खपत होती है।
किन उर्वरकों का निर्यात कर रहा है भारत?
निर्यात के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत मुख्य रूप से पोटेशियम सल्फेट, सब्जियों में इस्तेमाल होने वाले उर्वरक, ऑर्गेनिक उर्वरक, पोटेशियम क्लोराइड, अमोनियम नाइट्रेट और पशुओं के गोबर (India Fertilizer Export) से बनी कार्बनिक खाद (Organic Manure) का भारी मात्रा में निर्यात करता है।


