Drone MQ9B: चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से मिल रही चुनौती को देखते हुए भारत लगातार अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने का काम कर रहा है.
इसी कड़ी में अब भारत से एक खास ड्रोन खरीदने वाला है. यह वही ड्रोन है जिसकी मदद से अफगानिस्तान के काबुल में छिपे अलकायदा सरगना अयमान अल-जवाहिरी को मार गिराया गया था.
भारत के पास जल्द हो खतरनाक Drone MQ9B
भारत के पास जल्द ही दुनिया का सबसे खतरनाक ड्रोन MQ9B होगा. इस ड्रोन को अमेरिका जल्द ही भारत को सौंपेगा. अमेरिका के साथ MQ9B की डील फाइनल स्टेज में है. इसे स्पीड और फायरपावर के लिए भी जाना जाता है.
वजन की बात करें तो यह ड्रोन किसी अफ्रीकी हाथी के बराबर है. मोदी सरकार भी (LAC) पर चीन से कई इलाकों में तनाव के बीच अमेरिका से इस खतरनाक स्टील्थ को खरीदने की तैयारी में है.
भारत अपनी थल सेना और नौसेना के लिए अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन खरीद रहा है. रडार से बचाव में इसकी स्पीड और कॉमर्शियल प्लेन की भी ऊंचाई से कहीं ऊपर उड़ने की तकनीक काम आती हैं. जहां आम प्लेन 9 से 11 किमी ऊंचाई पर आसमान में उड़ान भरते हैं, रीपर ड्रोन 15 किमी की ऊंचाई पर उड़ता है.
MQ-9B ड्रोन की क्या है खासियत
- एमक्यू-9 रीपर एक मानव रहित विमान यानी ड्रोन है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 35 घंटे से अधिक समय तक 50,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है।
- MQ-9 Reaper की दूसरी सबसे बड़ी खासियत यह है कि हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल जैसे हथियारों से भी लैस किया जा सकता है।
- यह ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात होकर जमीन के साथ समुद्री लक्ष्य को निशाना बना सकता है।
- एमक्यू-9 रीपर सॉलिड कैमरों, सेंसर और रडार के साथ घंटों हवा में रहकर खुफिया जानकारी एकत्र कर सकता है।
– MQ-9 रीपर का निर्माण अमेरिकी कंपनी ‘जनरल एटॉमिक्स’ द्वारा किया गया है। - इस ड्रोन की कीमत 453 करोड़ 73 लाख से ज्यादा है।
- MQ-9B ड्रोन के दो वेरिएंट हैं: स्काई गार्डियन और सी गार्डियन. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत दोनों वेरिएंट खरीदने पर विचार कर रहा है.
- सी गार्डियन ड्रोन समुद्री निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, वहीं स्काई गार्डियन ड्रोन की तैनाती जमीनी सीमाओं की रखवाली के लिए की जाती है.
भारत भी खरीदना चाहता है इस ड्रोन को
रक्षा जानकारों का कहना है कि इस ड्रोन से तीनों सेना मजबूत होगी. इसके साथ-साथ इन मानव रहित विमानों का इस्तेमाल एयरबोर्न अली वार्निंग, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, एंटी-सरफेस वॉटफेयर और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर में किया जा सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका से खरीदे जाने वाले कुल 31 ड्रोन में से 15 ड्रोन भारतीय नौसेना के लिए, 8 ड्रोन सेना और शेष 8 ड्रोन वायु सेना को मिल सकते हैं.
इसे भी पढ़ें – बिहार में सूर्योपासना का महापर्व छठ कल से शुरू, छठ को लेकर बाजार में रौनक

