अरावली के 100 मीटर दायरे में बताने वाली परिभाषा को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया. उन्होंने इस पोस्ट में अरावली को दिल्ली (if Aravalli is not saved) का प्राकृतिक सुरक्षा कवच बताया है. उन्होंने कहा प्रिय दिल्लीवासियों, बची रहे जो अरावली तो दिल्ली रहे हरीभरी! अरावली को बचाना कोई विकल्प नहीं है बल्कि ये तो संकल्प होना चाहिए. मत भूलिए कि अरावली बचेगी तो ही एनसीआर बचेगा.
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अखिलेश ने इसपर जो देते हुए कहा कि अरावली को बचाना अपरिहार्य है क्योंकि यह दिल्ली और एनसीआर के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है या कहें क़ुदरती ढाल है. अरावली ही दिल्ली के ओझल हो चुके तारों को फिर से दिखा सकती है, पर्यावरण को बचा सकती है. अरावली पर्वतमाला ही दिल्ली के वायु प्रदूषण को कम करती है और बारिश-पानी में अहम भूमिका निभाती है. अरावली से ही एनसीआर की जैव विविधता बची हुई है. जो वेटलैंड गायब होते चले जा रहे हैं, उन्हें यही बचा सकती है. गुम हो रहे परिंदों को वापस बुला सकती है.
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if Aravalli is not saved – अखिलेश यादव ने कहा कि अरावली से ही एनसीआर का तापमान नियंत्रित होता है. इसके अलावा अरावली से एक भावात्मक लगाव भी है जो दिल्ली की सांस्कृतिक-ऐतिहासिक धरोहर का हिस्सा है. अरावली को बचाना, दिल्ली के भविष्य को बचाना है, नहीं तो एक-एक सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहे दिल्लीवासी स्मॉग जैसे जानलेवा हालात से कभी बाहर नहीं आ पाएंगे. आज एनसीआर के बुज़ुर्ग, बीमार और बच्चों पर प्रदूषण का सबसे ख़राब और ख़तरनाक असर पड़ रहा है.
