भारत की एक बड़ी आबादी पेट फूलने, सीने में जलन और एसिडिटी की समस्या से जूझ रही है। शोध बताते हैं कि करीब 60 से 70 फीसदी भारतीय साप्ताहिक रूप से पाचन संबंधी समस्याओं का सामना करते हैं। हालांकि हम अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसका मुख्य कारण (acidity and heartburn) हमारी जीवनशैली और खानपान की गलत आदतें हैं।

 एसिडिटी के पीछे का विज्ञान

एसिडिटी तब होती है जब पेट की ग्रंथियां (Gastric Glands) भोजन को पचाने के लिए जरूरत से ज्यादा हाइड्रोक्लोरिक एसिड का निर्माण करने लगती हैं। यह अतिरिक्त एसिड पेट की परत को (acidity and heartburn) नुकसान पहुँचाता है, जिससे सीने में जलन और खट्टी डकारें आने लगती हैं।

 चाय और लैक्टोज इंटॉलरेंस का कनेक्शन

डॉ. महेश गुप्ता (डायरेक्टर, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, फोर्टिस नोएडा) के अनुसार, कई लोगों को दूध वाली चाय पीने से गैस की समस्या होती है। इसका कारण लैक्टोज इंटॉलरेंस हो सकता है। यदि आपके शरीर में ‘लैक्टेज’ एंजाइम की कमी है, तो आप दूध को ठीक से पचा नहीं पाते, जिससे पेट फूलना, एसिडिटी या डायरिया की समस्या हो सकती है।

 लाइफस्टाइल और बिगड़ा हुआ खानपान

एसिडिटी केवल चाय तक सीमित नहीं है, बल्कि खराब जीवनशैली भी इसके लिए जिम्मेदार है:

    • शारीरिक सक्रियता की कमी: दिनभर बैठे रहने से मेटाबॉलिक रेट बिगड़ जाता है। रोजाना कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी अनिवार्य है।

    • बाहरी और तला-भुना खाना: मैदा, रिफाइंड ऑयल और अधिक तले-भुने भोजन का सेवन पाचन तंत्र और गट हेल्थ (Gut Health) को कमजोर बनाता है।

       

 

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