नई दिल्ली: मासिक धर्म (पीरियड्स) के दौरान तेज और असहनीय दर्द से जूझना आज के समय में अधिकांश महिलाओं के लिए एक आम समस्या बनता जा रहा है। हर महीने महिलाओं को पेट के निचले हिस्से में तीव्र ऐंठन, कमर दर्द, अत्यधिक थकान और मूड स्विंग्स जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लगातार बढ़ती (unbearable pain of periods) इन तकलीफों के बावजूद महिलाएं अपने खानपान पर समुचित ध्यान नहीं दे पाती हैं।
unbearable pain of periods – स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि हमारी दैनिक डाइट का सीधा संबंध पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द और उसकी तीव्रता से होता है। सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट और आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. वैशाली शर्मा के अनुसार, शरीर में आयरन और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की कमी माहवारी के दिनों को और अधिक कष्टदायक बना देती है।
शरीर में आयरन की कमी: अत्यधिक ब्लीडिंग और कमजोरी का बड़ा कारण
हर महीने होने वाले रक्तस्राव से शरीर का प्राकृतिक आयरन लेवल घटने लगता है। शरीर में आयरन का स्तर बहुत कम हो जाने पर लगातार थकान, शारीरिक दुर्बलता, एकाग्रता में कमी और चिड़चिड़ापन (मूड स्विंग्स) बढ़ जाता है। अपनी थाली में नियमित रूप से हरी पत्तेदार पालक, विभिन्न प्रकार की दालें, राजमा और छोले शामिल करें। नॉन-वेजिटेरियन महिलाएं संतुलित मात्रा में रेड मीट का सेवन कर सकती हैं।
मैग्नीशियम की कमी न होने दें
मैग्नीशियम गर्भाशय की मांसपेशियों को शिथिल करने और तंत्रिका तंत्र को शांत रखने में बेहद कारगर भूमिका निभाता है। महिलाओं के शरीर में मैग्नीशियम का स्तर कम होता है, उन्हें गर्भाशय में असामान्य ऐंठन और दर्द का सामना करना पड़ता है। कद्दू के बीज बादाम, केला और 70% या उससे अधिक कोको वाली डार्क चॉकलेट इसके बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत हैं।
ओमेगा-3 फैटी एसिड
पीरियड्स के दौरान गर्भाशय में तेज दर्द और खिंचाव का मुख्य कारण ‘प्रोस्टाग्लैंडिन’ नामक तत्व होते हैं, जो गर्भाशय की दीवारों में खिंचाव पैदा करते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड इन तत्वों के अत्यधिक निर्माण को रोककर गर्भाशय की सूजन और दर्द में प्रभावी राहत प्रदान करता है अखरोट, अलसी के बीज (Flaxseeds), चिया सीड्स और सैल्मन मछली को भोजन में शामिल करने से दर्द में तुरंत आराम मिलता है और मानसिक तनाव भी कम होता है।


