Close Menu
करंट न्यूज़करंट न्यूज़
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • आपदा में दुपट्टे का टुकड़ा बांधा था, अब अहमदाबाद से भेजी राखी: CM पुष्कर सिंह धामी को बहन धनगौरी का भावुक पत्र
    • पीरियड्स के असहनीय दर्द से पाएं राहत: गायनेकोलॉजिस्ट ने बताए 3 जरूरी न्यूट्रिएंट्स; पेनकिलर की नहीं पड़ेगी जरूरत
    • इंग्लैंड दौरे पर पाकिस्तान टीम में घमासान: कप्तान बाबर आजम को हुआ तेज बुखार; डॉक्टर ने दी 3 दिन आराम की सलाह
    • थाईलैंड के पटाया पहुंचा 5000 सैनिकों वाला अमेरिकी युद्धपोत ‘USS अब्राहम लिंकन’: रेड लाइट एरिया में पुलिस की ताबड़तोड़ रेड
    • क्लीन एनर्जी भरपूर, फिर भी कोयले पर निर्भरता क्यों?: ग्रिड क्षमता और बैटरी स्टोरेज की कमी से बर्बाद हो रही सौर ऊर्जा
    • 7,050mAh बैटरी और 144Hz कर्व्ड स्क्रीन के साथ Vivo T5 5G भारत में लॉन्च, ₹4,000 की छूट; देखें कीमत व फीचर्स
    • जन्माष्टमी पर क्यों बनाए जाते हैं लड्डू गोपाल के नन्हे चरण चिह्न? जानिए धार्मिक महत्व और सही दिशा
    • रोमांस छोड़ सस्पेंस-थ्रिलर की ओर मुड़ीं करीना कपूर: पृथ्वीराज सुकुमारन संग ‘दायरा’ में आएंगी नजर; पिछली 5 फिल्मों का रिपोर्ट कार्ड
    करंट न्यूज़करंट न्यूज़
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    Wednesday, September 2
    • होम
    • राज्य
      • दिल्ली
      • उत्तर प्रदेश
      • उत्तराखण्ड
      • मध्य प्रदेश
      • छत्तीसगढ़
      • हिमांचल प्रदेश
      • पंजाब
      • झारखण्ड
      • बिहार
      • राजस्थान
      • हरियाणा
      • गुजरात
      • महाराष्ट्र
      • जम्मू कश्मीर
    • देश
    • विदेश
    • मनोरंजन
    • खेल
    • टेक्नोलॉजी
    • धार्मिक
    • लाइफ स्टाइल
    करंट न्यूज़करंट न्यूज़
    Home » क्लीन एनर्जी भरपूर, फिर भी कोयले पर निर्भरता क्यों?: ग्रिड क्षमता और बैटरी स्टोरेज की कमी से बर्बाद हो रही सौर ऊर्जा

    क्लीन एनर्जी भरपूर, फिर भी कोयले पर निर्भरता क्यों?: ग्रिड क्षमता और बैटरी स्टोरेज की कमी से बर्बाद हो रही सौर ऊर्जा

    September 2, 2026 व्यापार 3 Mins Read
    Share
    Facebook Twitter Email WhatsApp Copy Link

    नई दिल्ली: भीषण गर्मी के दौरान जब भारत में बिजली की कुल मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही थी और रात के वक्त एसी चलने के कारण पावर सप्लाई संकट गहरा रहा था, उस समय रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों को अपना उत्पादन कम करने के निर्देश दिए जा रहे थे।

    इस विरोधाभास का मुख्य कारण यह रहा कि देश के पास वर्तमान ग्रिड क्षमता से कहीं अधिक क्लीन एनर्जी उपलब्ध थी, जिसे मौजूदा ट्रांसमिशन नेटवर्क सुरक्षित रूप से संभालने में सक्षम नहीं था। वैश्विक ऊर्जा थिंक टैंक एम्बर (Ember) के एक अध्ययन के अनुसार, पिछले 15 महीनों में भारत ने लगभग 11 टेरावाट-घंटे (TWh) सौर ऊर्जा का इस्तेमाल ही नहीं किया। यह इतनी बड़ी मात्रा है जिससे करीब एक करोड़ घरों को साल भर रोशन किया जा सकता था।

    ⚡ क्लीन पावर के सामने ‘कर्टेलमेंट’ की बड़ी चुनौती: कोयला संयंत्रों को धीमा करना मुश्किल

    उत्पादन और ग्रिड संतुलन की तकनीकी रुकावटें:

    • 300 गीगावाट की क्षमता: भारत के पास वर्तमान में 300 गीगावाट से अधिक स्वच्छ ऊर्जा (Clean Power) क्षमता मौजूद है, जो देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता के आधे से ज्यादा है।

    • कर्टेलमेंट (कटौती) का संकट: इसके बावजूद देश की अधिकांश बिजली का उत्पादन आज भी कोयला आधारित संयंत्रों से हो रहा है। इसका प्रमुख कारण ‘कर्टेलमेंट’ है—यानी जब सोलर या विंड प्लांट बिजली उत्पादन में सक्षम हों, लेकिन ग्रिड द्वारा भार न ले पाने के कारण उत्पादन जबरन रोकना पड़े।

    • थर्मल पावर का लचीला न होना: एम्बर के विश्लेषक नेश्विन रॉड्रिक्स के अनुसार, दोपहर के समय जब सौर ऊर्जा चरम पर होती है, तब कोयला आधारित थर्मल इकाइयों के उत्पादन को अचानक कम करना तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल कार्य है।

    📉 कंपनियों को आर्थिक घाटा और बढ़ता कार्बन उत्सर्जन: ट्रांसमिशन लाइनों का अभाव

    वित्तीय नुकसान और क्षेत्रीय उत्पादन का दबाव:

    • कंपनियों पर सीधा असर: वाइब्रेंट एनर्जी के सीईओ विनय पब्बा के मुताबिक, उत्पादन रोकने (कर्टेलमेंट) से उत्पादक कंपनियों को भारी राजस्व नुकसान झेलना पड़ता है, क्योंकि उन्हें भुगतान केवल उसी बिजली का मिलता है जो ग्रिड तक पहुंच पाती है।

    • पश्चिमी राज्यों में अधिक उत्पादन: गुजरात और राजस्थान जैसे राज्य अकेले देश की लगभग 50 फीसदी सौर ऊर्जा पैदा करते हैं। दोपहर के समय जब यहां सौर ऊर्जा पीक पर होती है, तो उसे अन्य क्षेत्रों तक ले जाने के लिए ट्रांसमिशन लाइनें अपर्याप्त साबित होती हैं।

    • कोयले पर निर्भरता: ट्रांसमिशन और स्टोरेज की तत्काल व्यवस्था न होने के कारण सस्ती रिन्यूएबल पावर की उपलब्धता के बावजूद कोयला संयंत्रों को लगातार चालू रखना मजबूरी बन जाता है।

    🔋 बैटरी स्टोरेज ही स्थायी समाधान: 2032 तक 74 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य

    भविष्य का रोडमैप और स्टोरेज की अनिवार्यता:

    • कोयले से सस्ती बैटरी पावर: यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के अध्ययन के अनुसार, बैटरी स्टोरेज युक्त रिन्यूएबल पावर नए कोयला संयंत्रों की तुलना में आर्थिक रूप से अधिक किफायती साबित हो सकती है।

    • दोपहर की धूप, रात में रोशनी: बैटरी स्टोरेज की सहायता से दोपहर में बनने वाली अतिरिक्त सौर ऊर्जा को संग्रहित कर रात के पीक आवर्स में उपयोग में लाया जा सकता है।

    • लक्ष्य से पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत में वर्तमान में लगभग 3 गीगावाट बैटरी स्टोरेज क्षमता है, जबकि वर्ष 2032 तक इसे 74 गीगावाट तक बढ़ाने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जहां नई ट्रांसमिशन लाइनें तैयार करने में कम से कम 3 वर्ष का समय लगता है, वहीं बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को तेजी से स्थापित कर इस बिजली बर्बादी को रोका जा सकता है।

    Follow on Google News Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on YouTube Follow on WhatsApp
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email Telegram WhatsApp Copy Link

    Keep Reading

    LIC के दो नए धमाकेदार प्लान: गारंटीड सेविंग्स के साथ मिलेगा प्योर लाइफ कवर, 7 सितंबर से शुरू होगी बिक्री

    चीनी पर महंगाई की ‘मीठी मार’: ₹74/किलो तक पहुंचे खुदरा दाम, आयात छूट और स्टॉक लिमिट के बाद भी राहत नहीं

    यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस में ईंधन संकट: भारत बना बड़ा मददगार, 2 महीने में भेजा 10 लाख बैरल पेट्रोल

    एवरेस्ट और एलजी हींग की बिक्री पर FSSAI की रोक: जांच में फेल हुए सैंपल, गुणवत्ता मानकों में मिली भारी कमी

    रिलायंस-डिज्नी जॉइंट वेंचर से डिज्नी का घाटा घटा: JioStar का मुनाफा बढ़कर ₹3,145 करोड़ हुआ, रेवेन्यू 46.5% उछला

    E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने का डर खत्म: सरकार सख्त करेगी नियम, 3 PPM क्लोराइड लिमिट होगी अनिवार्य

    • Facebook
    • YouTube
    • WhatsApp
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube

    राज्य -  दिल्ली    उत्तर प्रदेश    उत्तराखण्ड    मध्य प्रदेश    छत्तीसगढ़    हिमांचल प्रदेश    पंजाब    झारखण्ड    बिहार   राजस्थान    हरियाणा

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.