सूर्य उपासना का महापर्व छठ, जिसे महिलाएं संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं. यह पर्व अब सामाजिक एकता और कल्याण का प्रतीक बन गया है. उत्तर प्रदेश के बलिया में रहने वाली किन्नर अनुष्का पिछले आठ वर्षों से इसी महापर्व को पूरे विधि-विधान और निष्ठा के साथ मनाती आ रही हैं. वह निर्जला व्रत रखती हैं (faith for the society) और डूबते तथा उगते सूर्य को अर्घ्य देकर समाज के लिए मंगलकामना करती हैं.
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अनुष्का बताती हैं कि उन्हें छठ करने की प्रेरणा समाज के अन्य लोगों को देखकर मिली. उनका मानना है कि बलिया के लोग उन्हें सम्मान और बधाई देते हैं, और उन्हीं के सहयोग से उनकी रोजी-रोटी चलती है. इसी के नाते, वो सभी को अपने बच्चे समान मानती हैं और उनके कल्याण के लिए छठ का व्रत करती हैं.
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faith for the society – उन्होंने कहा, ‘सब कर रहे हैं, मैं क्यों न करूं’ यह विचार उन्हें समाज से ही मिल. वो पिछले आठ वर्षों से यह व्रत कर रही हैं, जबकि उनसे पहले उनके गुरुजी भी 23 वर्षों तक यह व्रत करते थे. उन्होंने बताया कि उनकी मन्नत यही है कि जो निर्धन हैं उनको धन प्राप्ति हो, जिसका पुत्र नहीं है उनको पुत्र रत्न प्राप्ति हो, और शहर में अमन और सुख-शांति बनी रहे. उन्होंने बताया कि वे इस महापर्व को बेदुआ मुहल्ले में मनाती हैं. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वह रविंद्र भाटिया यूनिवर्सिटी से MA की पढ़ाई की है और सागर पाली के पास वैना में रहती हैं.

