दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (डूसू) चुनाव के प्रचार के दौरान सामने आए कथित हिंसा और तोड़फोड़ के मामलों पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि इस तरह की घटनाएं किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हैं, और सुनवाई के दौरान पेश किए गए सबूतों से यह स्पष्ट होता है कि चुनावी माहौल में इस तरह का उपद्रव बेहद चिंताजनक है.

🚫 2. हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी- उपद्रवियों पर नहीं हुई कार्रवाई तो रोकी जाएगी वोटों की गिनती और रिजल्ट की घोषणा

शुक्रवार को होने वाली वोटिंग पर कोर्ट ने रोक तो नहीं लगाई है, लेकिन दिल्ली यूनिवर्सिटी और दिल्ली पुलिस को कड़ी चेतावनी देते हुए निर्देश दिए हैं कि वे कल तक की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट पेश करें. बार एंड बेंच के अनुसार, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि रिपोर्ट से अदालत संतुष्ट नहीं हुई तो वोटों की गिनती रोकने और चुनाव परिणाम जारी करने पर रोक लगाने जैसे कड़े आदेश दिए जा सकते हैं.

🏛️ 3. मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच ने जताई चिंता, कहा- लोकतंत्र को ‘क्रिमिनल सोसाइटी’ में बदलने की नहीं दी जा सकती इजाजत

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र को क्रिमिनल सोसाइटी के रूप में बदलने की इजाजत नहीं दी जा सकती. कोर्ट ने लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों और न्यायिक आदेशों के लगातार उल्लंघन पर चिंता जताई है, जबकि डीयू प्रशासन ने भी वोटिंग और रिजल्ट को लेकर सुरक्षा और ट्रैफिक के कड़े इंतजाम किए हैं.

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