उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 17 दिनों से 68,500 शिक्षक (protest continues for 17 days) भर्ती के अभ्यर्थी धरने पर बैठे हैं। यह पूरा मामला शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े विवाद का है। प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के खास मौके पर प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने अनोखा तरीका अपनाते हुए पहले रक्तदान किया और फिर उसी खून से प्रधानमंत्री के नाम पत्र लिखा। इन पत्रों के माध्यम से पीएम से इस मामले में हस्तक्षेप करने और न्याय की गुहार लगाई गई है। अभ्यर्थियों ने पीएम मोदी के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह के नाम भी पत्र भेजे हैं।
protest continues for 17 days – अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि 68,500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े विवाद का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। उनका दावा है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से जो आदेश जारी किया गया था, उसका सही से अनुपालन कराया जाए। मौसम चाहे बारिश का हो या तेज गर्मी का, अभ्यर्थियों का कहना है, जब तक सरकार की तरफ से ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
पुराना है 68,500 शिक्षक भर्ती का विवाद
यह पूरा मामला कोई नया नहीं है, बल्कि 68,500 शिक्षक भर्ती की चयन प्रक्रिया, आरक्षण और अधिकारों को लेकर लंबे समय से विवादों में रहा है। अब इस मौजूदा आंदोलन में अभ्यर्थी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश को आधार बना रहे हैं। खून से लिखे गए इन खतों में ओबीसी और दिव्यांग अभ्यर्थियों को उनका हक और न्याय दिलाने की पुरजोर मांग की गई है, ताकि इस लंबे खिंच चुके विवाद का स्थाई समाधान निकल सके।
