धार : मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस ऐतिहासिक और युगांतकारी फैसले के बाद, जिसने हिंदू पक्ष को वर्ष के सभी 365 दिन निर्बाध पूजा-अर्चना का पूर्ण वैधानिक अधिकार सौंप दिया है, आज का (history changed after 721 years) पहला शुक्रवार धार नगर स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर के लिए एक स्वर्णिम अध्याय लिखने जा रहा है। इस पावन और ऐतिहासिक अवसर पर आज भोजशाला के भीतर ज्ञान की देवी मां वाग्देवी (सरस्वती जी) की भव्य महाआरती और विशेष पूजन-अर्चन की व्यापक स्तर पर तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।  

🏰 सज-धजकर पूरी तरह तैयार हुई राजा भोज की नगरी 

इस ऐतिहासिक शुक्रवार का गवाह बनने के लिए पूरी धार नगरी को तोरण द्वारों और भगवा ध्वजों से सजाकर दुल्हन की तरह तैयार किया गया है। स्थानीय लोग अत्यंत उत्साह में हैं और सोशल मीडिया व घर-घर जाकर एक-दूसरे को इस विशेष महाआरती में शामिल होने के लिए भावभीने निमंत्रण पत्र और संदेश भेज रहे हैं। तय और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, हिंदू संगठनों और न्यास की अगुवाई में आज सुबह ठीक नौ बजे भोजशाला परिसर (history changed after 721 years) के मुख्य भाग में मां वाग्देवी की महाआरती उतारी जाएगी।

⚖️ हमेशा के लिए खत्म हुई शुक्रवार की नमाज की व्यवस्था 

उल्लेखनीय है कि इतिहास के पन्नों में दर्ज 721 वर्षों के एक बेहद लंबे, धैर्यपूर्ण और कानूनी संघर्ष के बाद यह संपूर्ण देश और धार के इतिहास में पहला ऐसा ऐतिहासिक अवसर होगा, जब शुक्रवार के दिन भोजशाला परिसर अल्लाह-हू-अकबर के बजाय मां वाग्देवी के पवित्र जयकारों और शंखनाद से पूरी तरह गूंज उठेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के साल 2003 के पुराने नियम के तहत अब तक प्रत्येक शुक्रवार को यहां दोपहर में मुस्लिम पक्ष को नमाज अदा करने की विशेष प्रशासनिक अनुमति दी गई थी, जिसे माननीय हाई कोर्ट ने अपने नवीनतम फैसले में साक्ष्यों के आधार पर पूरी तरह निरस्त कर दिया है।

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