दिल्ली की सूरत जल्द ही पूरी तरह बदलने वाली है. दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) अपनी ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के जरिए राजधानी के शहरी परिदृश्य को नया रूप देने की तैयारी में है. इस योजना के (DDA New Housing Policy) तहत मौजूदा और प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर के साथ-साथ नमो भारत (RRTS) स्टेशनों के आसपास किफायती आवास और आधुनिक बुनियादी ढांचे को विकसित किया जाएगा.
डीडीए के उपाध्यक्ष एन. सरवण कुमार ने स्पष्ट किया है कि इस नीति को लागू करने के लिए जल्द ही आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के साथ उच्च स्तरीय बैठकें शुरू होंगी. यह नीति न केवल परिवहन के साधनों के पास घर उपलब्ध कराएगी, बल्कि दिल्ली में बढ़ती भीड़ को भी व्यवस्थित करेगी.
क्या है TOD और NOD जोन?
इस योजना के तहत मेट्रो कॉरिडोर और नमो भारत लाइनों के 500 मीटर के दायरे को विकास के लिए चिन्हित किया गया है. मेट्रो कॉरिडोर के दोनों तरफ के 500 मीटर के दायरे को टीओडी (TOD) जोन कहा जाएगा. नमो भारत रेलवे लाइन के 500 मीटर के रेडियस को एनओडी (NOD) जोन के रूप में पहचाना जाएगा.
योजना की मुख्य विशेषताएं और प्रभाव
यह योजना दिल्ली के लगभग 207 वर्ग किमी के विशाल क्षेत्र को कवर करेगी. घनी आबादी वाले क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने के लिए 400 से 500 तक का उच्च फ्लोर एरिया रेशो (FAR) अनुमत होगा. इसका मतलब है कि स्टेशनों के पास अब और भी ऊंची इमारतें बन सकेंगी.
किफायती आवास पर जोर
योजना के तहत कुल निर्मित क्षेत्र (Built-up Area) का 65 फीसदी हिस्सा आवास के लिए अनिवार्य किया गया है. इसका मुख्य लक्ष्य मध्यम आय वर्ग और जरूरतमंदों को सस्ते घर उपलब्ध कराना है. टीओडी (DDA New Housing Policy) विकास के लिए अब 2000 वर्ग मीटर के बड़े प्लॉट भी अधिकृत किए गए हैं.


