जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बुधवार को उस समय जमकर हंगामा हुआ जब बीजेपी की विधायक शगुन परिहार ने आरोप लगाया कि सरकार किश्तवाड़ के कुछ इलाकों की अनदेखी कर रही है क्योंकि (controversy over age limit) वहां राष्ट्रवादी हिंदू रहते हैं. विधायक की इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई. इसी दौरान राज्य सरकार ने बुधवार को विधानसभा में एक अहम विधेयक भी पेश किया, जिसमें चुनाव आयुक्त की आयुसीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है.
मंत्री जाविद डार ने कहा कि ये टिप्पणियां सांप्रदायिक हैं और इन्हें कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए. वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक नजीर अहमद खान गुरेजी ने कहा कि हजारों मुसलमानों ने देश के लिए कुर्बानी दी है, ऐसे में किसी भी धर्म विशेष को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए.
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controversy over age limit – इस विवादित टिप्पणी के बीच उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में मुसलमान, सिख और ईसाई भी हिंदुओं की तरह ही राष्ट्रवादी हैं. वहीं परिहार ने कहा कि पीडीपी नेताओं ने भी मंगलवार को सदन की कार्यवाही के दौरान ऐसी ही टिप्पणी की थी.
जम्मू-कश्मीर सरकार ने बुधवार को विधानसभा में एक अहम विधेयक पेश किया है. इस विधेयक में सरकार ने राज्य निर्वाचन आयुक्त (SEC) के पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 65 साल से बढ़ाकर 70 साल करने का प्रस्ताव रखा है. विधेयक के मसौदे में कहा गया है, राज्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल पांच साल का होगा. वह 70 साल की आयु होने तक पद पर रह सकते हैं।
