तमाम अटकलों के बीच लद्दाख और जम्मू-कश्मीर की लोकसभा सीटों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच डील डन हो गई है. इसमें ये तय हुआ है कि कश्मीर संभाग की तीनों लोकसभा सीटों (अनंतनाग, बारामुला और श्रीनगर) पर नेशनल कॉन्फ्रेंस लड़ेगी. जबकि जम्मू संभाग की दो सीटों (जम्मू और उधमपुर) के साथ ही लद्दाख लोकसभा सीट पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी. इस डील पर एक नजर डालें तो ये बात साफ है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपनी शर्तें मनवाई हैं. पार्टी ने अपनी उन सीटों पर समझौता नहीं किया है, जिन पर उसके सांसद हैं. कांग्रेस को वही सीटें दी हैं, जहां बीजेपी का कब्जा है.
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कांग्रेस की राह नहीं है आसान
बता दें कि कांग्रेस की सहयोगी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के जम्मू संभाग के कई बड़े नेता भाजपाई हो चुके हैं. इसमें उमर अब्दुल्ला के राजनीतिक सलाहकार रहे देवेंद्र सिंह राणा का नाम प्रमुख है. राणा ने 2021 में बीजेपी का दामन थाना था. इस तरह कांग्रेस को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. एक ओर गुलाम नबी आजाद जम्मू संभाग में अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
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वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस के आहत महबूबा मुफ्ती भी कोई कसर नहीं छोड़ने वाली हैं. बीते दिनों उन्होंने कहा भी था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने हमारे लिए उम्मीदवार खड़ा करने और चुनाव लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा है. उन्होंने कहा, जब इंडिया ब्लॉक की बैठक मुंबई में हुई तो मैंने कहा था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला हमारे वरिष्ठ नेता हैं. वो सीट-बंटवारे पर निर्णय लेंगे. न्याय करेंगे. मुझे उम्मीद थी कि वो पार्टी हितों को एक तरफ रख देंगे.
इसके साथ ही महबूबा ने दो टूक कहा कि वो उमर के फैसले और उनकी पार्टी के रैवये से आहत हैं. इन सबके बीच अनंतनाग लोकसभा सीट पर और भी ट्विस्ट देखने को मिल सकता है. यहां से गुलाम नबी आजाद, महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रत्याशी मियां अल्ताफ के बीच दिलचस्प जंग देखने को मिल सकती है. महबूबा को भी इसका भान है. शायद इसीलिए उन्होंने बीते दिनों बयान भी दिया था, जिसमें आजाद को घेरा था.

