बरनाला : जिले में गेहूं के अवशेषों (नाड़) को आग लगाने की बढ़ती घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। डिप्टी कमिश्नर हरप्रीत सिंह (IAS) ने पुलिस और प्रशासनिक टीमों को (administration on burning wheatgrass) गांवों में कड़ी निगरानी रखने और खेतों का निरंतर दौरा करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वालों और ड्यूटी में कोताही बरतने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
📋 लापरवाह अधिकारियों पर गिरी गाज, 70 को मिला नोटिस
डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि जिले में नाड़ जलाने से रोकने के लिए तैनात की गई टीमों की कार्यप्रणाली की रोजाना वर्चुअल मीटिंग के जरिए समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरत रहे हैं, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अब तक की कार्रवाई:
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कारण बताओ नोटिस: ड्यूटी में ढील देने पर अब तक 70 नोडल अधिकारियों, क्लस्टर और सहायक क्लस्टर अधिकारियों को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
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निगरानी तंत्र: जिले में 40 क्लस्टर/सहायक क्लस्टर और 254 नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं, जो वायु गुणवत्ता आयोग के निर्देशों को लागू करने के लिए उत्तरदायी हैं
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💸 किसानों पर कसी नकेल: दर्ज हो रही FIR, लगा 4 लाख का जुर्माना
वायु गुणवत्ता आयोग के सख्त निर्देशों के मद्देनजर, खेतों में आग लगाने वाले किसानों के खिलाफ भी कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है। डिप्टी कमिश्नर ने जानकारी दी कि आगजनी की रिपोर्ट मिलते ही मौके की (administration on burning wheatgrass) पड़ताल की जाती है और दोषी पाए जाने पर संबंधित किसानों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने के साथ-साथ पर्यावरण मुआवजा (जुर्माना) भी लगाया जा रहा है।

