नई दिल्ली: बांझपन (Infertility) के इलाज हेतु आईवीएफ (IVF) का चलन वर्तमान में काफी बढ़ गया है। आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान महिलाओं को कुछ हार्मोनल दवाएं दी जाती हैं, जिसके कारण कई लोगों में यह भ्रांति बन जाती है कि ये दवाएं प्रसव के उपरांत दूध बनने (Lactation) की प्राकृतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, चिकित्सा (mothers milk is affected by IVF) विशेषज्ञों ने इस धारणा को पूरी तरह से नकारते हुए स्पष्ट किया है कि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
आईवीएफ नहीं, अधिक उम्र और सी-सेक्शन हो सकते हैं स्तनपान में देरी की मुख्य वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, आईवीएफ से मां बनने वाली कुछ महिलाओं को स्तनपान में कठिनाई आ सकती है, किंतु आईवीएफ प्रक्रिया इसका प्रत्यक्ष कारण नहीं है। वास्तव में इसकी मुख्य वजहें अधिक उम्र में मां बनना, सिजेरियन डिलीवरी (C-Section), जुड़वां बच्चे (Twins), समय से पूर्व प्रसव (Preterm Birth), गर्भावस्था में मधुमेह (Gestational Diabetes) या उच्च रक्तचाप (Hypertension) जैसी चिकित्सीय स्थितियां होती हैं। ये स्वास्थ्य समस्याएं स्तनपान शुरू होने में आंशिक देरी कर सकती हैं, किंतु आईवीएफ उपचार नहीं।
जन्म के पहले घंटे में शुरू कराएं स्तनपान, 6 महीने तक दें केवल मां का दूध
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के अनुसार, नवजात शिशु के जन्म के प्रथम 1 घंटे के भीतर स्तनपान प्रारंभ कर देना चाहिए और शुरुआती 6 महीनों तक केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। मां का गाढ़ा पीला दूध (Colostrum) शिशु को संपूर्ण पोषण प्रदान करता है तथा उसे संक्रमण, दस्त व भविष्य की कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षा कवच प्रदान करता है। इसके साथ ही स्तनपान कराने से मां की शारीरिक रिकवरी तेजी से होती है और (mothers milk is affected by IVF) कैंसर व मेटाबॉलिक बीमारियों का जोखिम भी कम होता है।


