लखनऊ : नवनिर्मित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य में कथित भ्रष्टाचार और गंभीर वित्तीय व तकनीकी अनियमितताओं का मामला अब इलाहाबाद उच्च न्यायालय की चौखट पर पहुंच गया है। एक्सप्रेसवे निर्माण में भारी घोटाले और घटिया सामग्री के इस्तेमाल के आरोपों को लेकर दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर (allegations of corruption) सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है।
allegations of corruption – माननीय उच्च न्यायालय ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के सचिव, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के चेयरमैन और उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि काउंटर एफिडेविट में जनहित याचिका (PIL) में उठाए गए प्रत्येक तथ्य, निर्माण गुणवत्ता, टेंडर प्रक्रिया और भ्रष्टाचार के आरोपों पर विस्तृत व स्पष्ट स्थिति प्रस्तुत की जाए। अब केंद्र सरकार, राज्य सरकार के संबंधित विभागों और एनएचएआई को कोर्ट के समक्ष अपना विधिक व तकनीकी पक्ष रखना होगा।
पहली ही बारिश में धंसी सड़क, निर्माण कंपनी ‘पीएनसी इंफ्राटेक’ पर लगा प्रतिबंध
उल्लेखनीय है कि लगभग 4,200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हुए इस लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों के भीतर मानसून की पहली बारिश में ही सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया था। सड़क धंसने से हुए जान-माल के खतरे और व्यापक जन-आक्रोश के बाद एनएचएआई ने तत्काल दंडात्मक कार्रवाई शुरू की। एनएचएआई ने एक्सप्रेसवे का सिविल निर्माण करने वाली प्रमुख कंपनी ‘पीएनसी इंफ्राटेक’ (PNC Infratech) को भविष्य की किसी भी सरकारी परियोजना में भाग लेने और बोली लगाने (Bidding) से प्रतिबंधित कर दिया है।


